दरगाह शरीफ उर्स के समापन पर अंजुमन मोइनिया फ़ख़रिया का संदेश मानवता, करुणा और न्याय की अपील
दरगाह शरीफ अजमेर में सालाना उर्स के समापन अवसर पर अंजुमन मोइनिया फ़ख़रिया ने मानवता, करुणा और न्याय का सशक्त संदेश दिया। अंजुमन की ओर से जारी बयान में भारत और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
अजमेर। दरगाह शरीफ अजमेर में सालाना उर्स के समापन अवसर पर अंजुमन मोइनिया फ़ख़रिया ने मानवता, करुणा और न्याय का सशक्त संदेश दिया। अंजुमन की ओर से जारी बयान में भारत और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
अंजुमन ने कहा कि नफ़रत, भीड़ हिंसा और धर्म के नाम पर की जा रही हत्याएँ इंसानियत के मूल सिद्धांतों और सभी धर्मों की शिक्षाओं के विरुद्ध हैं। बयान में स्पष्ट किया गया कि किसी भी समुदाय के साथ होने वाला अत्याचार अस्वीकार्य है और समाज को एकजुट होकर इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
बांग्लादेश और भारत की घटनाओं की कड़ी निंदा
अंजुमन मोइनिया फ़ख़रिया ने सूफ़ी संत हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि उर्स का अवसर हमें पीड़ितों के साथ खड़े होने, समानता, प्रेम और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
इसी क्रम में अंजुमन ने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या की कड़ी निंदा की और दोषियों को कठोर सज़ा दिए जाने की मांग की। अंजुमन ने कहा कि न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए सभी धर्मों और समुदायों को मिलकर नफरत के खिलाफ आवाज उठानी होगी।

