विधानसभा में उठा खेजड़ी संरक्षण का मुद्दा, हरीश चौधरी ने सरकार पर साधा निशाना

बायतु विधायक हरीश चौधरी ने विधानसभा में खेजड़ी कटाई पर सरकार घेरा। "कानून दिखावा"—400 साल पुराने पेड़ खतरे में। छप्पनिया अकाल का जिक्र। विपक्ष सतर्क।

विधानसभा में उठा खेजड़ी संरक्षण का मुद्दा, हरीश चौधरी ने सरकार पर साधा निशाना

बाड़मेर — बायतु विधायक हरीश चौधरी ने गुरुवार को राजस्थान विधानसभा में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाते हुए राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाने की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध और आंदोलन को नजरअंदाज किया जा रहा है।

विधानसभा के बाहर मीडिया से बातचीत में चौधरी ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है, क्योंकि प्रदेश के कई इलाकों में हजारों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं बल्कि राजस्थान की जीवन रेखा है और इसे खत्म किया जाना पर्यावरण और ग्रामीण जीवन दोनों के लिए बड़ा खतरा है।

चौधरी ने बताया कि कानूनी रूप से खेजड़ी को संपत्ति का दर्जा प्राप्त है, फिर भी इसकी लगातार कटाई हो रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि एक पेड़ काटकर दूसरा लगाने की बात केवल दिखावा है, क्योंकि खेजड़ी का पेड़ सैकड़ों वर्षों में विकसित होता है और इसकी औसत आयु करीब 400 वर्ष मानी जाती है।

विधायक ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पूर्वजों ने खेजड़ी की रक्षा के लिए बलिदान दिए थे और छप्पनिया अकाल के दौरान लोगों ने इसकी छाल खाकर अपना जीवन बचाया था। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस पेड़ के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि सरकार का मौन खेजड़ी काटने वालों को प्रोत्साहित कर रहा है और इस मुद्दे पर विपक्ष तथा समाज लगातार विरोध दर्ज कराता रहेगा।

खेजड़ी संरक्षण को लेकर प्रदेश में पर्यावरण और ग्रामीण जीवन से जुड़े संगठनों की चिंता भी बढ़ती जा रही है, और अब यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बनता दिख रहा है।