अरावली बचाओ का अभियान तेज, पुष्कर में सैंड आर्ट से दिया गया संदेश

तीर्थ नगरी पुष्कर के रेतीले धोरों पर अंतर्राष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने 100 टन से अधिक बालू से एक विशाल कलाकृति बनाकर अरावली पर्वतमाला को राजस्थान की लाइफलाइन बताते हुए संरक्षण का संदेश दिया।

अरावली बचाओ का अभियान तेज, पुष्कर में सैंड आर्ट से दिया गया संदेश

तीर्थ नगरी पुष्कर के रेतीले धोरों पर अंतर्राष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने 100 टन से अधिक बालू से एक विशाल कलाकृति बनाकर अरावली पर्वतमाला को राजस्थान की लाइफलाइन बताते हुए संरक्षण का संदेश दिया। यह आर्ट जन जागरूकता के साथ-साथ सरकार तक चिंता पहुंचाने का शांतिपूर्ण प्रयास है। बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग इस कलाकृति को देखकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़ रहे हैं।daee51,b49c99,fc9317

क्यों हो रहा है विरोध?

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में केंद्र सरकार की समिति की सिफारिश स्वीकार कर अरावली की नई परिभाषा तय की: केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियां ही अरावली मानी जाएंगी। इससे 90% से अधिक हिस्सा संरक्षण से बाहर हो सकता है, जिससे अवैध खनन, निर्माण और पर्यावरण क्षरण का खतरा बढ़ेगा। असर: भूजल स्तर गिरना, जैव विविधता नष्ट होना, रेगिस्तान का फैलाव और दिल्ली-NCR तक धूल-प प्रदूषण बढ़ना।

पूर्व सीएम अशोक गहलोत सहित कई नेता और पर्यावरणविद् इसका विरोध कर रहे हैं। #SaveAravalli मुहिम सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है।