VIP नंबर बांटने में 500 करोड़ का नुकसान, 39 अधिकारियों-कर्मचारियों पर FIR

राजस्थान के परिवहन विभाग में लंबे समय से चर्चित ‘थ्री-डिजिट घोटाले’ में अब बड़ी कार्रवाई सामने आई है। वीआईपी और मनचाहे नंबर रेवड़ियों की तरह बांटने के मामले में जयपुर के गांधीनगर थाने में 39 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

VIP नंबर बांटने में 500 करोड़ का नुकसान, 39 अधिकारियों-कर्मचारियों पर FIR

राजस्थान के परिवहन विभाग में लंबे समय से चर्चित ‘थ्री-डिजिट घोटाले’ में अब बड़ी कार्रवाई सामने आई है। वीआईपी और मनचाहे नंबर रेवड़ियों की तरह बांटने के मामले में जयपुर के गांधीनगर थाने में 39 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस घोटाले से राज्य के राजकोष को करीब 500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

जयपुर आरटीओ (प्रथम) राजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत पर दर्ज इस एफआईआर में आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर सरकारी रिकॉर्ड में अवैध हेराफेरी की। फर्जी दस्तावेज तैयार कर थ्री-डिजिट और फैंसी नंबरों का मनमाने तरीके से आवंटन किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि हुई।

2129 गाड़ियों के फैंसी नंबरों में हेरफेर

गांधीनगर थाने के एसएचओ भजनलाल के अनुसार, परिवहन विभाग की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में 2129 गाड़ियों को नियमों के विपरीत तीन डिजिट के नंबर देने का आरोप है। इससे न सिर्फ नियमों की अनदेखी हुई, बल्कि सरकार के राजस्व को भी बड़ा झटका लगा।

दिग्गज अधिकारी भी शामिल

इस मामले में संयुक्त आयुक्त धर्मपाल आसीवाल, आरटीओ इन्दु मीणा, एआरटीओ प्रकाश टहलियानी, डीटीओ संजय शर्मा, सुनील सेनी, संजीव भारद्वाज, संस्थापन अधिकारी राज सिंह चौधरी सहित कई अधिकारी और कर्मचारी नामजद हैं। इनके अलावा 12 से अधिक अन्य कार्मिकों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

बताया जा रहा है कि आरटीओ (प्रथम) राजेंद्र सिंह शेखावत की जांच और सक्रियता के चलते यह घोटाला सामने आया। अब संभावना जताई जा रही है कि अन्य जिलों में भी इसी तरह के मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज हो सकती हैं। यह मामला राजस्थान ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अब तक के सबसे बड़े और चर्चित घोटालों में गिना जा रहा है।