कोटा भामाशाह मंडी में धान की बंपर आवक, गुजरात-हरियाणा से एक्सपोर्टर्स का डेरा, कीमतें 3,300 तक पहुंचीं

राजस्थान के कोटा स्थित भामाशाह कृषि उपज मंडी में धान की बंपर आवक ने पूरे कृषि बाजार में हलचल मचा दी है। मध्य प्रदेश और हाड़ौती क्षेत्र से आ रही उच्च गुणवत्ता वाली धान की फसल न केवल स्थानीय किसानों को लाभ पहुंचा रही है।

कोटा भामाशाह मंडी में धान की बंपर आवक, गुजरात-हरियाणा से एक्सपोर्टर्स का डेरा, कीमतें 3,300 तक पहुंचीं

कोटाराजस्थान के कोटा स्थित भामाशाह कृषि उपज मंडी में धान की बंपर आवक ने पूरे कृषि बाजार में हलचल मचा दी है। मध्य प्रदेश और हाड़ौती क्षेत्र से आ रही उच्च गुणवत्ता वाली धान की फसल न केवल स्थानीय किसानों को लाभ पहुंचा रही है, बल्कि खाड़ी देशों के लिए निर्यात करने वाले व्यापारियों को भी अपनी ओर खींच रही है। गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से आए एक्सपोर्टर्स मंडी में डेरा डाले हुए हैं, जिससे धान की कीमतों में उछाल आ गया है। फिलहाल, मंडी में रोजाना करीब 2 लाख बोरी धान की आवक हो रही है, जो तुरंत ही बिक भी रही है।

उच्च गुणवत्ता का धान: खाड़ी देशों का पसंदीदा

कोटा की भामाशाह मंडी में आने वाला धान अपनी चमकदार अनाज, अच्छी पैदावार और न्यूनतम नमी वाली क्वालिटी के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह धान खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, UAE और कुवैत में बेहद लोकप्रिय है, जहां इसे बासमती और गैर-बासमती श्रेणी में निर्यात किया जाता है। मध्य प्रदेश के मंदसौर और रतलाम जिले तथा राजस्थान के हाड़ौती संभाग (कोटा, बारां, बूंदी) से आने वाली यह फसल कम कीटनाशक अवशेष और उच्च पोषण मूल्य के कारण अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है।

मंडी कमेटी के सदस्य रमेश चंद्र जैन ने बताया, “इस सीजन में धान की आवक अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत से, हरियाणा के करनाल से तथा महाराष्ट्र के नागपुर से एक्सपोर्टर्स यहां डेरा डाले हैं। वे बड़े-बड़े गोदामों में स्टॉक कर रहे हैं, क्योंकि खाड़ी बाजार में मांग चरम पर है।”

कीमतों में भारी उछाल: किसानों की कमाई दोगुनी

एक्सपोर्टर्स की लगातार खरीदारी से धान के भावों में तेजी का रुख देखा जा रहा है। कुछ ही दिनों पहले जहां धान ₹2,200 से ₹2,400 प्रति क्विंटल बिक रहा था, वहीं अब यह ₹3,000 से ₹3,300 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। कुछ प्रीमियम वैरायटी जैसे धान पूसा और 1509 के भाव ₹3,500 तक छू चुके हैं।

एक स्थानीय किसान रामलाल मीणा ने कहा, “पिछले साल ₹2,000 के आसपास बिकने वाला धान इस बार अच्छे दाम मिलने से खुशी हो रही है। मंडी की सुविधाओं के कारण हमारा माल जल्दी बिक जाता है, और कोई बिचौलिया नहीं घूमता।” मंडी में रोजाना 2 लाख बोरी (प्रति बोरी 50 किलो) धान की आवक और बिक्री से व्यापारियों का टर्नओवर करोड़ों में पहुंच गया है।

अन्य राज्यों से एक्सपोर्टर्स का आगमन: मंडी की साख बढ़ी

भामाशाह मंडी की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि न केवल राजस्थान के बूंदी, सवाई माधोपुर और झालावाड़ जैसे जिलों से किसान अपनी उपज लेकर आ रहे हैं, बल्कि देश के कोने-कोने से एक्सपोर्टर्स भी यहां डेरा डाले हैं। गुजरात के व्यापारी समीर पटेल ने बताया, “कोटा का धान क्वालिटी में कमाल का है। हम इसे UAE भेजते हैं, जहां प्रति टन ₹50,000 तक मिल जाते हैं। यहां की पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया हमें आकर्षित करती है।”

मंडी कमेटी के अनुसार, इस सीजन में एक्सपोर्टर्स की संख्या पिछले साल से 40% अधिक है। इससे न केवल किसानों को लाभ हो रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिल रहा है। ट्रांसपोर्टर, लेबर और गोदाम मालिकों की रोजगार की भरमार हो गई है।

भामाशाह मंडी का विस्तार: दुनिया की बड़ी मंडियों में शामिल होने की तैयारी

कोटा की भामाशाह कृषि उपज मंडी पहले से ही एशिया की प्रमुख मंडियों में शुमार है, लेकिन अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। लोकसभा स्पीकर और कोटा-भाषाई के सांसद ओम बिरला ने हाल ही में मंडी के विस्तार के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें आधुनिक गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, डिजिटल वेटिंग सिस्टम और निर्यात सुविधाओं का समावेश होगा।

स्पीकर बिरला ने कहा था, “भामाशाह मंडी कोटा को कृषि निर्यात का हब बनाना हमारा लक्ष्य है। आने वाले 2-3 वर्षों में यह दुनिया की टॉप-10 कृषि मंडियों में शामिल हो सकती है।” मंडी प्रबंधन ने 500 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां साइलो, प्रोसेसिंग यूनिट और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होंगे। इससे न केवल धान, बल्कि सोयाबीन, सरसों और अन्य फसलों की आवक बढ़ेगी।

किसानों के लिए राहत, पारदर्शिता और तेज बिक्री

भामाशाह मंडी की ई-नीलामी प्रणाली ने किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाई है। यहां पारदर्शी बोली प्रक्रिया के कारण कोई घपला नहीं होता। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में मंडी से 50 लाख टन से अधिक उपज का व्यापार हुआ, जो राजस्थान की जीडीपी में योगदान दे रहा है। हालांकि, बढ़ती आवक के कारण कभी-कभी भीड़भाड़ की समस्या होती है, जिसके लिए मंडी प्रशासन अतिरिक्त स्टाफ तैनात कर रहा है।

यह बंपर आवक न केवल कोटा के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, बल्कि पूरे हाड़ौती क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। एक्सपोर्टर्स की रुचि से लगता है कि आने वाले महीनों में धान के भाव और ऊंचाई छू सकते हैं।