राज्यपाल बागड़े का विपक्ष पर तीखा प्रहार: 'वन नेशन वन इलेक्शन' और EVM बहस पर बड़ा बयान

राजस्थान RIC: राज्यपाल बागड़े ने वन नेशन वन इलेक्शन, EVM पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। 305 निकाय चुनाव एक साथ। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर बड़ा बयान

राज्यपाल बागड़े का विपक्ष पर तीखा प्रहार: 'वन नेशन वन इलेक्शन' और EVM बहस पर बड़ा बयान

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर जयपुर स्थित RIC में आयोजित कार्यक्रम में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और EVM को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर परोक्ष रूप से विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदान प्रणाली की पारदर्शिता, जनता की भागीदारी और संवैधानिक मूल्यों को सबसे ऊपर रखते हुए ही चुनाव से जुड़े हर मुद्दे पर विचार होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने हाल के दिनों में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ मॉडल और EVM के उपयोग पर उठ रहे सवालों के बीच यह संकेत दिया कि चुनावी व्यवस्था में किसी भी तरह का बदलाव हो, वह संविधान और लोकतांत्रिक नियमों के दायरे में ही स्वीकार्य है। उन्होंने मतदाताओं से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की और कहा कि पारदर्शी, भरोसेमंद और समय पर आयोजित चुनाव ही जनता के विश्वास का आधार हैं।

इधर, राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को एक साथ कराए जाने की तैयारी तेज़ है। प्रस्तावित योजना के तहत राज्य के 305 निकायों में चुनाव प्रक्रिया को एकीकृत कर मतदान को सरल और व्यवस्थित बनाने की कवायद जारी है। सरकार का तर्क है कि इससे प्रशासनिक बोझ कम होगा, संसाधनों की बचत होगी और मतदाताओं के लिए भी प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो जाएगी।

हालांकि विपक्षी दल इस मॉडल पर कड़ा ऐतराज जता रहे हैं। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और एकीकृत स्थानीय चुनावों की आड़ में सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में देरी कर रही है और स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर न कराकर जनप्रतिनिधियों और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर रही है। विपक्ष का कहना है कि इससे न केवल स्थानीय स्तर पर राजनीतिक जवाबदेही कमजोर होती है, बल्कि चुनावी तैयारियों, बूथ प्रबंधन और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

राज्यपाल बागड़े ने अपने संबोधन में सीधे किसी दल का नाम लिए बिना कहा कि चुनावी बहसें और मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन अन्तिम निर्णय हमेशा संवैधानिक ढांचे, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और मतदाता के हितों को सर्वोच्च मानकर ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि EVM के उपयोग, मतदान की तारीखों के निर्धारण और चुनावी प्रक्रियाओं में किसी भी संशोधन को पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानूनी प्रावधानों की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने नए मतदाताओं को लोकतंत्र के “सक्रिय भागीदार” के रूप में अपनी जिम्मेदारी समझने की बात कही और युवाओं से अपील की कि वे अफवाहों और दुष्प्रचार से दूर रहकर तथ्याधारित जानकारी के आधार पर अपना मताधिकार प्रयोग करें। कार्यक्रम के अंत में निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक सहज, तकनीक-समर्थ और भरोसेमंद बनाने के लिए राज्यपाल ने सभी पक्षों से संवाद और सहमति-आधारित सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया।