तेजस्वी को RJD की कमान, गिरिराज सिंह ने छेड़ा वंशवाद का मुद्दा

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले को RJD में “तेजस्वी युग” की शुरुआत माना जा रहा है। लालू प्रसाद यादव के लंबे नेतृत्व के बाद पार्टी अब युवा नेतृत्व की ओर बढ़ती दिख रही है। हालांकि, इस नियुक्ति पर भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने वंशवाद का आरोप लगाया है, वहीं पार्टी के भीतर भी मतभेद के संकेत मिले हैं। जानिए इस फैसले के राजनीतिक मायने, फायदे-नुकसान और बिहार की राजनीति पर इसका असर।

तेजस्वी को RJD की कमान, गिरिराज सिंह ने छेड़ा वंशवाद का मुद्दा

तेजस्वी को RJD की कमान, गिरिराज सिंह ने छेड़ा वंशवाद का मुद्दा

बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से नियुक्त किया है, जिससे पार्टी की संगठनात्मक कमान अब औपचारिक रूप से उनके हाथ में आ गई है। यह निर्णय माना जा रहा है कि RJD में “तेजस्वी युग” की शुरुआत है और लालू प्रसाद यादव के लंबे नेतृत्व के बाद पार्टी को नई दिशा व युवा नेतृत्व देने का प्रयास है। पिछले चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन और लालू यादव की स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए यह परिवर्तन जरूरी माना गया।

घटना के दौरान पटना में आयोजित बैठक में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती और अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहे, और पार्टी के पक्ष में यह निर्णय लिया गया।

पार्टी ने इसे “एक नए युग का शुभारंभ” बताते हुए संगठन को मजबूत करने व आगामी राजनीतिक मोर्चों पर बेहतर तैयारी की दिशा में अहम कदम बताया।

हालाँकि इस नियुक्ति पर भाजपा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे वंशवादी राजनीतिक ढाँचे से भारत के लोकतंत्र को खतरा है और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। गिरिराज सिंह के बयान में यह भी कहा गया कि लालू परिवार की राजनीति “वंशवाद का प्रतीक” बन गई है।

पार्टी के अंदर भी इस फैसले को लेकर हल्की मतभेद की खबरें सामने आई हैं — तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अप्रत्यक्ष रूप से विरोध व पार्टी नेतृत्व को लेकर असंतोष जताया है, जिससे RJD के अंदर आंतरिक कलह के संकेत भी सामने आए हैं।

इस नियुक्ति का राजनीतिक कारण यह बताया जा रहा है कि RJD को पारिवारिक नेतृत्व का आधिकारिक हस्तांतरण, संगठन में युवा ऊर्जा और सक्रिय निर्णय प्रक्रिया, तथा राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीतिक मंच को मजबूत करना है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव की स्वास्थ्य स्थिति के चलते पार्टी को शीर्ष स्तर पर स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता महसूस हुई।

इसका राजनीतिक प्रभाव

RJD को फायदा : तेजस्वी यादव के नेतृत्व से पार्टी को युवापक्ष और बिहार के बाहर भी मजबूत संगठनात्मक पहचान मिल सकती है, और आगामी चुनावों की रणनीति में एक नई दिशा आएगी।

भीतरी मतभेद : परिवार के अंदर असंतोष (जैसे रोहिणी का रिएक्शन) और आलोचना से पार्टी को आंतरिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

विपक्ष का हमला : गिरिराज सिंह जैसे नेताओं के आरोपों से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़ सकते हैं, जिससे RJD को लोकतांत्रिक वैधता पर चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है।