चिकित्सा विभाग में 50 लाख का घोटाला, प्रेग्नेंसी टेस्ट किट से लेकर मेडिकल डिवाइस तक तीन गुना दाम पर खरीदी
राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नियमों को दरकिनार कर सरकारी खजाने को चूना लगाने का बड़ा मामला सामने आया है। जालोर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में करीब 50 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है।
जालोर। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नियमों को दरकिनार कर सरकारी खजाने को चूना लगाने का बड़ा मामला सामने आया है। जालोर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में करीब 50 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। यह मामला RTI से प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट के जरिए उजागर हुआ है, जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाजार से तीन गुना महंगी खरीद
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन CMHO डॉ. भैराराम जाणी पर आरोप है कि उन्होंने अजमेर की एक चहेती फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए बाजार दर से 200 से 300 प्रतिशत अधिक कीमत पर मेडिकल उपकरण खरीदे।
प्रेग्नेंसी टेस्ट किट: बाजार कीमत 7 रुपये, खरीदी गई 25 रुपये प्रति किट
हीमोग्लोबिन मीटर: वास्तविक कीमत करीब 10,000 रुपये, भुगतान किया गया 28,000 रुपये
ग्लूकोमीटर: बाजार मूल्य 3,750 रुपये, खरीदा गया 9,500 रुपये में
इन खरीदों से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
तारीखों में हेराफेरी, ‘टाइम ट्रेवल’ जैसा मामला
घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू सप्लाई और मैन्युफैक्चरिंग डेट में की गई गड़बड़ी है। रिकॉर्ड के अनुसार, प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की सप्लाई 31 मार्च 2025 को दिखाई गई, जबकि उन किट्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट मई 2025 अंकित है। यानी किट्स की सप्लाई, उनके बनने से पहले ही दिखा दी गई।
मामला सामने आने के बाद सप्लाई रजिस्टर में काट-छांट कर तारीख 10 मई 2025 दर्ज की गई, जबकि भुगतान के बिल पहले ही मार्च में पास हो चुके थे। यह साफ तौर पर दस्तावेजी हेराफेरी और वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
कार्रवाई की मांग तेज
RTI कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का उदाहरण है। अब सवाल उठ रहे हैं कि दोषियों पर कब और क्या सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

