बसों की रिमॉडलिंग बन रही जानलेवा, क्या है इसके नियम, किन नियमों की हो रही है अनदेखी

जैसलमेर में हुए बस हादसे के बाद प्रशासन से लेकर परिवहन विभाग तक में हलचल मच गई हैं। इसी कड़ी में बसों के बॉडी निर्माण को लेकर जयपुर-दिल्ली हाईवे पर स्थित कई कारखानों में अब सतर्कता और सख्ती बढ़ा दी गई है।

बसों की रिमॉडलिंग बन रही जानलेवा, क्या है इसके नियम, किन नियमों की हो रही है अनदेखी

जैसलमेर में हुए बस हादसे से जहां पूरा राजस्थान कांप उठा, वही अब भी सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ती बसें नियमों का उल्लंघन कर रही है। आपको बता दें की बस मालिक कंपनी से चेसिस निकलवाने के बाद उसे नियमों को ताक में रखकर अपने हिसाब उसकी रिमॉडलिंग करवाते है जिसके चलते बसो में खामियों की संभावना बढ़ जाती हैं।

जैसलमेर में हुए बस हादसे के बाद प्रशासन से लेकर परिवहन विभाग तक में हलचल मच गई हैं। इसी कड़ी में बसों के बॉडी निर्माण को लेकर जयपुर-दिल्ली हाईवे पर स्थित कई कारखानों में अब सतर्कता और सख्ती बढ़ा दी गई है।

जानकारी के अनुसार जयपुर-दिल्ली हाईवे पर ऐसे कई छोटे-बड़े कारखाने हैं, जहां ट्रक और बसों की बॉडी तैयार की जाती है। इन कारखानों में किसी भी बस की बॉडी निर्माण प्रक्रिया चेसिस से शुरू होती है। यानी, पहले बस निर्माता कंपनी से मिलने वाला चेसिस आता है, जिसके बाद उसी आकार के अनुसार बॉडी डिजाइन की जाती है।

कारखाना मालिकों के मुताबिक, सरकार और RTO की ओर से सख्त दिशा-निर्देश जारी हैं कि बस की बॉडी चेसिस के आकार और वजन के हिसाब से ही तैयार की जाए। ओवरसाइज बॉडी न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

साथ ही कुछ कारखाना संचालक बताते हैं कि कई बस मालिक खुद बड़ी बॉडी की डिमांड करते हैं, ताकि यात्रियों की संख्या बढ़ाई जा सके। इस वजह से कभी-कभी नियमों की अनदेखी भी होती है। लेकिन अब जैसलमेर हादसे के बाद ऐसे सभी फैक्ट्री मालिक अलर्ट हो गए हैं। वे अब किसी भी कीमत पर मानक से बड़ी बॉडी नहीं बना रहे।

 बस की बॉडी तैयार होने के बाद वाहन सीधे RTO (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) पहुंचता है। RTO अधिकारी तकनीकी जांच करते हैं– चेसिस साइज, वजन, चौड़ाई, ऊंचाई, सीटिंग अरेंजमेंट और सुरक्षा उपकरणों की जांच के बाद ही अप्रूवल दिया जाता है। RTO की मंजूरी के बिना कोई भी बस सड़क पर नहीं चल सकती।

इसपर कुछ फैक्ट्री मालिकों ने कैमरे पर आने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे नियमों का पालन करते हैं, लेकिन इस समय माहौल संवेदनशील है। वहीं, कुछ मालिकों ने बताया कि हादसे के बाद से अब RTO टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। किसी भी फैक्ट्री में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी गई है।

वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बस निर्माण प्रक्रिया को सख्ती से मॉनिटर किया जाए और केवल मानक बॉडी वाली बसों को ही सड़क पर उतरने की अनुमति दी जाए। तो सड़क हादसों की संख्या में कमी लाई जा सकती है। कुल मिलाकर, जैसलमेर हादसे के बाद बस निर्माण उद्योग में जागरूकता बढ़ी है। अब जयपुर-दिल्ली हाईवे के कारखाने पहले से कहीं अधिक सतर्क हैं, जहां हर नए चेसिस के साथ सुरक्षा, नियम और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।