अंता उपचुनाव: सांकली गांव में मतदान बहिष्कार, किस बजह से किया बहिष्कार जानिए
राजस्थान के बारां जिले के अंता विधानसभा उपचुनाव के दौरान सांकली गांव में ग्रामीणों द्वारा मतदान बहिष्कार की घटना ने स्थानीय मुद्दों को फिर से उजागर कर दिया है। सुबह 7 बजे शुरू हुए मतदान के दौरान गांव के सैकड़ों मतदाताओं ने पानी की लंबे समय से चली आ रही समस्या के विरोध में वोटिंग का बहिष्कार किया।
बारां। राजस्थान के बारां जिले के अंता विधानसभा उपचुनाव के दौरान सांकली गांव में ग्रामीणों द्वारा मतदान बहिष्कार की घटना ने स्थानीय मुद्दों को फिर से उजागर कर दिया है। सुबह 7 बजे शुरू हुए मतदान के दौरान गांव के सैकड़ों मतदाताओं ने पानी की लंबे समय से चली आ रही समस्या के विरोध में वोटिंग का बहिष्कार किया। हालांकि, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति नियंत्रित हो गई, और अब मतदान फिर से शुरू हो चुका है। नीचे इस घटना का विस्तृत कारण और अपडेट दिया गया है।
बहिष्कार का मुख्य कारण: पानी की गंभीर समस्या
सांकली गांव, जो अंता विधानसभा क्षेत्र का एक ग्रामीण इलाका है, लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार
- भूजल स्तर में गिरावट: क्षेत्र में कृषि और सिंचाई के अत्यधिक उपयोग से भूजल स्तर तेजी से गिरा है। हैंडपंप और कुएं सूख चुके हैं, जिससे पीने के पानी की कमी हो गई है।
- नल-जल योजना की विफलता: केंद्र सरकार की 'हर घर जल' योजना के तहत लगाए गए हैंडपंप और पाइपलाइनें ठीक से काम नहीं कर रही हैं। गांव में लगे 10-12 हैंडपंपों में से केवल 3-4 ही कार्यशील हैं, बाकी खराब पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ गांव तक नहीं पहुंचा।
- मौसमी प्रभाव: नवंबर-दिसंबर में सूखे का मौसम होने से समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों को दूर के तालाबों या नदियों से पानी लाना पड़ता है, जो अक्सर दूषित होता है।
- विकास कार्यों की अनदेखी: स्थानीय नेताओं (विशेषकर सांसद दुष्यंत सिंह के क्षेत्र होने के बावजूद) पर आरोप है कि वे सड़क, बिजली के साथ-साथ पानी की समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। वसुंधरा राजे ने हालिया रोड शो में इसी मुद्दे को उठाया था, जहां उन्होंने कहा, "सांसद के बेटे यहां से हैं, फिर भी लोग पानी-सड़क की समस्या से जूझ रहे हैं।"
ग्रामीणों ने 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का नारा लगाते हुए मतदान केंद्र के बाहर धरना दिया। गांव में लगभग 800-1,000 मतदाता हैं, जिनमें से 200-300 ने शुरुआती घंटों में बहिष्कार किया। यह घटना बिहार चुनावों (2025) में देखे गए 'रोड नहीं तो वोट नहीं' जैसे विरोधों की याद दिलाती है, जहां विकास मुद्दों पर ग्रामीणों ने वोटिंग का बहिष्कार किया।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
- टीम भेजना: उपचुनाव के जिला निर्वाचन अधिकारी रोहिताश्व सिंह तोमर के निर्देश पर तुरंत एक उच्च स्तरीय टीम (PHED विभाग, तहसीलदार और पुलिस) को सांकली भेजा गया। टीम ने ग्रामीणों से बातचीत की और आश्वासन दिया।
- समाधान के कदम:
- तत्काल टैंकर से पानी की आपूर्ति शुरू की गई।
- खराब हैंडपंपों की मरम्मत के लिए इंजीनियरों की टीम बुलाई गई, जो 2-3 दिनों में काम पूरा करेगी।
- लंबे समय के लिए नई पाइपलाइन और जल संरक्षण योजना (जैसे वर्षा जल संचयन) का वादा किया गया।
प्रभाव और आगे की स्थिति
- उपचुनाव पर असर: यह घटना अंता उपचुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले (बीजेपी-मोरपाल सुमन, कांग्रेस-प्रमोद जैन भाया, निर्दलीय-नरेश मीणा) में विकास मुद्दों को केंद्र में ला रही है। ग्रामीण इलाकों में वोट प्रतिशत पर असर पड़ सकता है।
- सुरक्षा और सुविधाएं: सभी 268 मतदान केंद्रों पर पेयजल, छाया और वेबकास्टिंग की व्यवस्था है, लेकिन यह घटना स्थानीय समस्याओं की गहराई दिखाती है।

