बजट से पहले राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री का ‘मुँह मीठा’ कराया — जनता का भी मुँह मीठा होगा या फिर धोखा?

बजट से पहले राष्ट्रपति द्वारा वित्त मंत्री का मुंह मीठा कराना एक परंपरा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या Budget 2026 आम जनता को भी राहत देगा? बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और पिछले बजटों के रिकॉर्ड के बीच जनता की उम्मीदें और सरकार की परीक्षा।

बजट से पहले राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री का ‘मुँह मीठा’ कराया — जनता का भी मुँह मीठा होगा या फिर धोखा?

बजट से पहले राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री का ‘मुँह मीठा’ कराया — जनता का भी मुँह मीठा होगा या फिर धोखा?

Budget 2026: उम्मीदें, हकीकत, इतिहास और जनता का दर्द

मोदी सरकार का रिकॉर्ड और जनता का अनुभव

केंद्रीय बजट 2026-27 आज 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश होने वाला है , और इस बार ये ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश कर रही हैं — एक रिकॉर्ड जो अब तक किसी वित्त मंत्री के लगातार नहीं रहा। 

लेकिन सवाल यह है कि जनता आम लोगों के घर तक राहत पहुंचेगी या नहीं?

पिछले बजटों में सरकार ने कई योजनाओं की घोषणा की थी —
 मध्यम वर्ग के लिए इनकम टैक्स स्लैब में संशोधन
 किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट वृद्धि
 स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च
 डिजिटल और बुनियादी ढांचा निवेश 
लेकिन महंगाई, रोज़गार और गरीब-किसान की जेब में राहत के मामले में आम आदमी के अनुभव अलग रहा है।

Budget 2026 में क्या उम्मीदें हैं?

आर्थिक विशेषज्ञ, सोसायटी और घर-घर तक बजट का असर महसूस करने वाले लोगों की तीन बड़ी मांगें हैं:

1. महंगाई में राहत

2025 के अंत तक देश में महंगाई लगातार बनी हुई थी और रोजमर्रा की चीज़ों के दाम ऊपर जा रहे हैं, जैसे कि एलपीजी सिलेंडर की कीमत में तुरंत इज़ाफा बजट से पहले ही हुआ। 
लोगों का सवाल — क्या बजट में ऐसे कदम होंगे जो रसोई और जीवनयापन पर बोझ कम करेंगे?

2. टैक्स में सच्ची राहत

पिछले बजट में टैक्स स्लैब में छूट बढ़ी थी, लेकिन मध्यम वर्ग को वास्तव में बेहतर राहत की उम्मीद अभी भी है। इस बार भी इनकम टैक्स स्लैब और नई टैक्स व्यवस्था के बारे में चर्चा है, पर यह देखा जाना बाकी है कि कभी-कभी बड़े टैक्स सिस्टम बदलाव का फायदा सीधे लोगों की जेब तक नहीं पहुँचता

3. रोज़गार और कृषि को प्राथमिकता

सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल है:

  • रोजगार कैसे बढ़े?

  • खेती/किसानों की आय में सुधार कब आएगा?

  • ग्रामीण इलाकों में लोगों की हालत में सुधार कैसे आएगा?

आर्थिक सर्वे में भी संकेत मिले हैं कि गेहूँ-चावल-मूल्य असंतुलन, वैश्विक ट्रेड तनाव और खेती की कम ग्रोथ जैसी चुनौतियाँ 2026 बजट में महत्वपूर्ण होंगी। 

Budget की वास्तविक चुनौतियाँ — सिर्फ घोषणा नहीं

भावी बजट 2026 के सामने कुछ बड़ी परीक्षाएँ हैं:

 महंगाई और घरेलू खर्च

महंगाई नियंत्रण के उपाय बजट में चुने जा सकते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते मूल्यों का असर हर घर पर है — रसोई गैस, अनाज, तेल-मसाले और दैनिक उपयोग की चीज़ों पर। कुछ मामलों में राहत पैकेज भी महंगाई को रोकने में कमज़ोर साबित हो सकते हैं

 बेरोज़गारी

टैक्स में राहत से एक्सट्रा इनकम तो मिल सकती है, लेकिन अगर नए रोजगार सृजन की गारंटी न हो, तो यह राहत फ़िज़ूल की लग सकती है।

 कृषि संकट

किसानों की आमदनी, ऋण व्यवस्था, मौसम-आधारित जोखिम और मार्केटिंग सुधार जैसे मुद्दे बजट का महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे। अगर बजट केवल बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर फंडिंग पर केंद्रित रहा, तो गाँवों को राहत नहीं मिलेगी।

इतिहास के रिकॉर्ड्स कहते क्या?

भारत के बजट का इतिहास 1860 के बाद से चलता आ रहा है और हर दशक में उम्मीदों की बढ़ोतरी होती रही है। लेकिन:

  • जाहिर-सी राहत योजनाओं के बावजूद

  • आम आदमी को सीधी जेब में राहत

  • महंगाई दबाव और रोज़गार की कमी जैसी वास्तविक समस्याओं से राहत
    लगाता हुआ बजट कभी-कभी पूर्ण रूप से सफल नहीं हुआ है। 

उदाहरण:

 पहले के बजटों में इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा पर खर्च बढ़ा।
 टैक्स स्लैब में छूट मिली।
 सामाजिक योजनाओं को फंड मिला।
लेकिन महंगाई, रोज़गार और दैनिक खर्चों में गिरावट नहीं आए — यह आम लोगों की सोच में अभी भी प्रमुख चिंता का विषय है।

Budget 2026 — जनता को क्या मिलेगा और क्या नहीं?

संभावित राहत

  • कुछ वर्गों के लिए इनकम टैक्स में छूट।

  • छोटे कारोबारियों और किसानों को वित्तीय पैकेज।

  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार की दिशा में निवेश। 

हर घर तक सीधी राहत की गारंटी नहीं

  • महंगाई में त्वरित गिरावट बजट से कठिन लगती है।

  • बेरोज़गारी और निवेश में सीधी रोज़गार वृद्धि हमेशा बजट से मिलती नहीं।

  • दिन-प्रतिदिन की जीवन लागत में डाउनट्रेंड अभी तक स्पष्ट नहीं दिखा है।

क्या Budget 2026 जनता का मुँह मीठा करेगा?

यह सवाल सिर्फ आकांक्षा नहीं, बल्कि जरूरत है
क्योंकि पिछले सालों के बजट से यह साबित हुआ है कि विकास-धारकों में निवेश जरूर हुआ, पर आम आदमी की जेब और रोज़मर्रा के खर्चों में राहत अपेक्षानुसार नहीं दिखी

अब बजट 2026 में:

  • टैक्स में आसान-सी राहत

  • महंगाई के नियंत्रण के ठोस उपाय

  • रोजगार-उत्पादन की नीतियाँ
    अगर शामिल नहीं होंगे, तो आज की महंगाई और असमान आर्थिक दबाव के बीच यह बजट सिर्फ कागज़ों पर सुन्दर रहेगा।

आज का बजट सिर्फ कागज़ों का आंकड़ा नहीं, बल्कि एक प्रशासन की प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब है।
अगर जनता का मुँह मीठा होना है, तो अगले बजट में:

  • सीधी राहत योजनाएँ,

  • महंगाई नियंत्रण उपाय,

  • नौकरी और ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ता
    जैसे निर्णय होना ज़रूरी हैं।

अब सवाल यह है —
क्या Budget 2026 जनता की असली मुश्किलों के जवाब देगा, या सिर्फ आंकड़ों की कड़ियाँ होंगी?