मदन राठौड़ को मिली बड़ी राहत, BSNL पर क्यों लगा 50 हजार का जुर्माना

राजस्थान के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को 9 साल पुरानी लड़ाई में बड़ी जीत मिली है। पाली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीएसएनएल की मनमानी को बेनकाब करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

मदन राठौड़ को मिली बड़ी राहत, BSNL पर क्यों लगा 50 हजार का जुर्माना

जयपुरराजस्थान के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को 9 साल पुरानी लड़ाई में बड़ी जीत मिली है। पाली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीएसएनएल की मनमानी को बेनकाब करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 2016 में विदेश यात्रा के दौरान ली गई सिम का कभी उपयोग नहीं हुआ, फिर भी बीएसएनएल ने 1 लाख 10 हजार 540 रुपये का बिल थमा दिया था। आयोग ने इस बिल को पूरी तरह रद्द कर दिया, 10 हजार रुपये की सिक्योरिटी जमा राशि वापस लौटाने और बीएसएनएल के महाप्रबंधक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

9 साल पुराना मामला, 13 नवंबर 2025 को आया फैसला

मदन राठौड़ ने 2016 में एक राजनीतिक विदेश यात्रा के दौरान आपातकालीन स्थिति के लिए बीएसएनएल की अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सिम ली थी। उनका स्पष्ट दावा रहा कि सिम कभी सक्रिय नहीं की गई और इसका एक मिनट भी उपयोग नहीं हुआ। इसके बावजूद बीएसएनएल ने बिना किसी कॉल डिटेल या सबूत के 1 लाख 10 हजार 540 रुपये का बिल भेज दिया।

जून 2018 में राठौड़ ने अधिवक्ता मनीष ओझा के माध्यम से पाली जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। लंबी सुनवाई के बाद 13 नवंबर 2025 को पीठासीन अधिकारी अजय कुमार बंसल और सदस्य शिवराम माहिया की पीठ ने 22 पेज का विस्तृत फैसला सुनाया। आयोग ने इसे “उपभोक्ता के साथ खुला छलावा और सेवा में भारी कमी” करार दिया।

आयोग ने क्या-क्या आदेश दिए?

  1. 1,10,540 रुपये का पूरा बिल तुरंत रद्द किया जाए
  2. सिम लेते वक्त जमा 10,000 रुपये की सिक्योरिटी राशि ब्याज सहित वापस की जाए
  3. बीएसएनएल पाली के महाप्रबंधक पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए
  4. सभी आदेश 30 दिन के अंदर लागू किए जाएं, वरना 12% वार्षिक ब्याज देना होगा

राठौड़ का बयान: “यह आम उपभोक्ता की जीत है”

फैसले के बाद मदन राठौड़ ने कहा, “मैंने यह लड़ाई अपने लिए नहीं, हर उस आम नागरिक के लिए लड़ी जो सरकारी कंपनियों की मनमानी से परेशान है। आज उपभोक्ता आयोग ने साबित कर दिया कि संविधान और कानून सबसे ऊपर हैं। यह फैसला लाखों लोगों के लिए मिसाल बनेगा।”

उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी जीत

वकील मनीष ओझा ने बताया, “बीएसएनएल के पास कोई कॉल डिटेल रिकॉर्ड नहीं था। फिर भी बिल भेजना साफ धोखाधड़ी थी। यह फैसला पूरे देश में टेलीकॉम कंपनियों के लिए झटका है।” उपभोक्ता कार्यकर्ता भी इसे “ऐतिहासिक” बता रहे हैं क्योंकि सरकारी कंपनी पर इतना बड़ा जुर्माना और बिल रद्द करने का मामला राजस्थान में पहली बार हुआ है।