सीएम शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में जमीनी स्तर पर मजबूत हो रहा सहकारिता का नेटवर्क

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान सरकार सहकारिता के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और अंत्योदय के सिद्धांत को वास्तविक रूप देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में तेज गति से नई प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटी (PACS) एवं एम-पैक्स का गठन शुरू किया है।

सीएम शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में जमीनी स्तर पर मजबूत हो रहा सहकारिता का नेटवर्क

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान सरकार सहकारिता के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और अंत्योदय के सिद्धांत को वास्तविक रूप देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में तेज गति से नई प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटी (PACS) एवं एम-पैक्स का गठन शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुँच को व्यापक बनाना और सहकारिता को सामुदायिक विकास का प्रभावी माध्यम बनाना है।

 लक्ष्य से अधिक 1700 नवीन एम-पैक्स का गठन

राज्य सरकार द्वारा बजट वर्ष 2025-26 में आगामी दो वर्षों में लगभग 2600 पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में नई पैक्स स्थापित करने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के अनुरूप सहकारिता विभाग ने वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के लिए क्रमशः 1300-1300 पैक्स गठन का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया था।

लेकिन उल्लेखनीय रूप से, वित्तीय वर्ष 2025-26 के केवल 7 माह में ही 1700 नवीन एम-पैक्स का गठन किया जा चुका है। यह उपलब्धि वार्षिक लक्ष्य से लगभग 31 प्रतिशत अधिक है, जबकि दो वर्ष के कुल लक्ष्य का 65 प्रतिशत से अधिक कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया है।

वर्ष 2024-25 में निर्धारित 297 पैक्स गठन के लक्ष्य के मुकाबले 857 पैक्स स्थापित कर 288.5 प्रतिशत की उपलब्धि दर्ज की गई थी। यह आँकड़े बताते हैं कि राजस्थान सहकारिता क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार कर रहा है।

 राष्ट्रीय सहकारिता नीति के अनुरूप अग्रसर राजस्थान

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी राष्ट्रीय सहकारिता नीति और ‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्पना के तहत देशभर में सहकारिता का विस्तार प्राथमिकता में है। इस दिशा में राजस्थान देश में अग्रणी राज्यों में से एक है।

वर्तमान में राज्य में 8840 पैक्स का मजबूत नेटवर्क कार्यरत है, जिनमें से 8823 पैक्स सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में तेज गति से एम-पैक्स का गठन होने से सहकारिता ढांचा और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक हो रहा है।

सहकारी समितियों को दिया जा रहा बहुउद्देश्यीय स्वरूप

समय की बदलती जरूरतों के अनुरूप पारंपरिक पैक्स को अपडेट करते हुए सरकार ने उन्हें एम-पैक्स (मल्टी-परपज पैक्स) में रूपांतरित किया है। पहले पैक्स की भूमिका केवल किसानों को ऋण और खाद-बीज वितरण तक सीमित थी, लेकिन अब एम-पैक्स को कई व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे ये समितियां प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। सरकार की पहल के तहत अब एम-पैक्स के सदस्य केवल किसान ही नहीं, बल्कि बंटाईदार, कारीगर, शिल्पकार, पशुपालक, छोटे उद्यमी भी इन समितियों का हिस्सा बन सकेंगे। इससे सहकारिता की अवधारणा को व्यापक स्वरूप मिलता है और ग्रामीण आजीविका में नई संभावनाएं पैदा होती हैं।