अंता उपचुनाव में BJP के कई नेता अंदरखाने कांग्रेस के साथ थे, हनुमान बेनीवाल का राधा मोहन अग्रवाल पर तीखा प्रहार

राजस्थान की राजनीति में अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी के राजस्थान प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल के एक बयान पर जोरदार हमला बोला है।

अंता उपचुनाव में BJP के कई नेता अंदरखाने कांग्रेस के साथ थे, हनुमान बेनीवाल का राधा मोहन अग्रवाल पर तीखा प्रहार

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी के राजस्थान प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल के एक बयान पर जोरदार हमला बोला है। बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखे पोस्ट में आरोप लगाया कि अग्रवाल का बयान "हम चाहते तो अंता चुनाव हमारी जेब में होता" न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है, बल्कि यह दर्शाता है कि बीजेपी के कई नेता अंदरखाने कांग्रेस के उम्मीदवार के साथ खड़े थे। बेनीवाल ने भारत निर्वाचन आयोग से इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल उठाया है कि क्या चुनाव प्रक्रिया सत्ताधारी दल के चाहने से प्रभावित हो सकती है?

यह विवाद राजस्थान में हाल के उपचुनावों के बाद से चला आ रहा है, जहां बीजेपी ने सात में से पांच सीटें जीतीं। अंता सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा की जीत ने बीजेपी को झटका दिया था, और अब बेनीवाल के बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव RLP और बीजेपी के बीच बढ़ते वैमनस्य को दर्शाता है, जो किसान आंदोलन और जाट वोट बैंक की राजनीति से जुड़ा है।

राधा मोहन अग्रवाल का विवादित बयान 'चाहते तो जेब में होता'

बीजेपी के राजस्थान प्रभारी और राज्यसभा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने हाल ही में एक सभा में कहा था, "हम चाहते तो अंता चुनाव हमारी जेब में होता।" यह बयान उपचुनाव परिणामों के बाद बीजेपी की जीत पर उत्साह में आया था। अग्रवाल ने आगे सचिन पायलट को 'फर्जी नेता', हनुमान बेनीवाल को 'चूहा' और नरेश मीणा को 'लंपट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो पहले से ही विवादों में है। अग्रवाल ने दावा किया कि बीजेपी ने तीन 'मठाधीशों' को खत्म कर दिया, जिसमें खींवसर का जिक्र प्रमुख था।

अग्रवाल के इस बयान को बेनीवाल ने 'अपमानजनक' बताते हुए कहा कि इससे दो बातें साफ होती हैं:

बीजेपी की आंतरिक साजिश

अंता उपचुनाव में बीजेपी के कई नेता प्रदेश प्रभारी की 'सह पर' अंदरखाने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार (या निर्दलीय नरेश मीणा) के साथ खड़े थे। अगर बीजेपी पूरी ताकत लगाती तो चुनाव आसानी से जीत जाती।

चुनावी हेराफेरी का इशारा

 "हम चाहते तो..." कहना निर्वाचन आयोग को अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के अधीन बताने जैसा है। यह लोकतंत्र के मूल्यों का अपमान है और मतदाता सूची, राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक नियंत्रण का संकेत देता है।

बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से यह संज्ञान में आया है कि BJP राजस्थान के प्रभारी... ने यह कहा कि हम चाहते तो अंता चुनाव हमारी जेब में होता। इससे दो बातें स्पष्ट होती हैं।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि यह बयान राज्यसभा सांसद द्वारा दिया गया है, जो जिम्मेदारी की मिसाल होना चाहिए।

हनुमान बेनीवाल का चुनाव आयोग से सवाल

बेनीवाल ने अपने पोस्ट में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और राजस्थान निर्वाचन विभाग से अपील की है। उन्होंने लिखा, "मैं भारत निर्वाचन आयोग और निर्वाचन विभाग, राजस्थान से यह अपील करता हूं कि सत्ताधारी दल के एक जिम्मेदार व्यक्ति और राज्य सभा के सदस्य द्वारा कहे गए इन बयानों पर अपना वक्तव्य जारी करें कि क्या चुनाव प्रक्रिया राधामोहन दास अग्रवाल और उनकी पार्टी के चाहने से प्रभावित हो सकती थी या नहीं?"

यह अपील राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। बेनीवाल ने पहले भी उपचुनावों में बीजेपी पर 'धनबल और बाहुबल' का आरोप लगाया था। खासकर खींवसर में अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल की हार (13,000 वोटों से) के बाद उन्होंने कहा था, "लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है, लेकिन बीजेपी ने साजिश रची।" अंता में नरेश मीणा की जीत को RLP ने समर्थन दिया था, और बेनीवाल ने मीणा को 'सच्चा योद्धा' बताया था।