अजमेर के नसीराबाद में नाबालिग ने आत्महत्या का प्रयास, बॉडी शेमिंग की वजह बनी परेशानी

अजमेर जिले के नसीराबाद में केंद्रीय विद्यालय की कक्षा 9 की एक छात्रा ने कम हाइट को लेकर तानों और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर तालाब में कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया। मौके पर मौजूद एक युवक ने उसे बचा लिया। अस्पताल में इलाज के बाद उसकी हालत स्थिर बताई गई है। घटना के बाद स्कूलों में बॉडी शेमिंग और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अजमेर के नसीराबाद में नाबालिग ने आत्महत्या का प्रयास, बॉडी शेमिंग की वजह बनी परेशानी

अजमेर : जिले के नसीराबाद में स्कूल की पढ़ाई कर रही एक नाबालिग छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिससे इलाके में चिंता की लहर दौड़ गई है। यह घटना कम ऊँचाई (हाइट) को लेकर लगातार तानों और मानसिक प्रताड़ना से हताश होकर हुई, जिससे बच्ची ने तालाब में कूदकर जान देने की कोशिश की। हालांकि समय रहते एक युवक ने उसे बचा लिया और अस्पताल में इलाज के बाद उसकी हालत स्थिर बताई गई है।

घटना नसीराबाद शहर में तब सामने आई जब केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 9 की पढ़ने वाली छात्रा छुट्टी के बाद घर की ओर जा रही थी। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, उसकी सहपाठी एक अन्य छात्रा उसकी कम हाइट को लेकर समय-समय पर उसे ताने देती थी और अपमानजनक टिप्पणियाँ करती थी। यह ताने लंबे समय से जारी थे, जिससे बच्ची काफी मानसिक रूप से परेशान थी। घटना वाले दिन भी तानों से गहरा आहत होकर उसने तालाब में छलांग लगा दी।

बचाने वाले प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही बच्ची तालाब में कूदी, आसपास मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। तभी एक युवाने हिम्मत दिखाते हुए तालाब में छलांग लगाकर उसे बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज मिलने के कारण उसकी जान अब खतरे से बाहर है।

परिजनों ने बताया कि तानों और चिढ़ाने से बच्ची का आत्म-सम्मान बहुत प्रभावित हुआ था और वह मानसिक रूप से विचलित थी। लगातार हो रही अपमानजनक टिप्पणियाँ उसे गहरे तनाव में ले गईं, जो इस नाजुक कदम का कारण बनीं। इस घटना ने न सिर्फ परिजन बल्कि पूरे इलाके में स्कूलों में बॉडी शेमिंग और मानसिक प्रताड़ना जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने प्रशासन से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने, स्कूलों में काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की मांग उठाई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों। विशेषज्ञों का मानना है कि तानों और अपमानजनक व्यवहार से बच्चों का आत्म-विश्वास टूट सकता है, जिससे मानसिक तनाव और डिप्रेशन जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

 यह घटना स्कूलों में छोटे-छोटे तानों और मनोवैज्ञानिक दबावों को बढ़ावा देने वाले माहौल की चिंताओं को उजागर करती है, जहाँ बच्चों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।