सिंगला बांध के किसानों का अजमेर कूच, 96 ट्रैक्टरों की रैली बैरिकेडिंग पर रोकी; कलेक्टर को ज्ञापन देने की मांग
सिंगला बांध की भूमि का अवार्ड निरस्त कराने की मांग को लेकर किसानों ने 96 ट्रैक्टरों के साथ अजमेर कूच किया। पुलिस ने लोहागल के पास बैरिकेडिंग कर रैली रोकी। जानिए पूरा मामला।
सिंगला बांध की जमीन के भूमि अवार्ड को निरस्त कराने की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों ने बुधवार को बड़ा कदम उठाते हुए ट्रैक्टर रैली निकाली। रूपनगढ़ क्षेत्र से करीब 96 ट्रैक्टरों के साथ किसान अजमेर कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए, लेकिन शहर में प्रवेश से पहले ही पुलिस ने लोहागल के पास बैरिकेडिंग कर रैली को रोक दिया।
किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। वहीं, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रैली को आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और रास्ते में डंपर तथा जेसीबी भी खड़ी की गई है।
96 ट्रैक्टरों के साथ अजमेर कूच
सिंगला बांध पर कई दिनों से धरना दे रहे किसानों ने बुधवार को अजमेर कूच का फैसला किया। इसके तहत करीब 96 ट्रैक्टरों के साथ किसान रैली के रूप में अजमेर की ओर बढ़े। किसानों की योजना जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन देने की थी।
रैली के अजमेर शहर की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही शास्त्री नगर थाना पुलिस ने लोहागल के पास बैरिकेडिंग कर दी। पुलिस ने ट्रैक्टरों को आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद मौके पर किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत शुरू हुई।

100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात, जेसीबी-डंपर भी मौके पर
किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। रैली को रोकने के लिए करीब 100 पुलिसकर्मियों का जाब्ता मौके पर तैनात किया गया। इसके अलावा रास्ते में डंपर और जेसीबी भी खड़ी की गई।
पुलिस की कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी, हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से बातचीत का रास्ता अपनाया। रूपनगढ़ एसडीएम रामकुमार टाडा भी मौके पर पहुंचे और किसानों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा शुरू की।
एसडीएम की ओर से करीब 20 किसानों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए शास्त्री नगर थाने बुलाया गया। फिलहाल किसानों और प्रशासन के बीच वार्ता जारी है।
पूर्व विधायक नसीम अख्तर इंसाफ भी पहुंचीं
किसानों की ट्रैक्टर रैली की सूचना मिलने के बाद पुष्कर की पूर्व विधायक नसीम अख्तर इंसाफ भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने किसानों से बातचीत की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
किसान लंबे समय से चल रहे आंदोलन का समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि भूमि अवार्ड निरस्त करने सहित उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित समाधान होना चाहिए।
20 दिन से सिंगला बांध पर धरना
किसानों का यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। प्रभावित किसान पिछले करीब 20 दिनों से सिंगला बांध पर धरना दे रहे हैं। उनका मुख्य विवाद बांध के भराव क्षेत्र में आने वाली कृषि भूमि के पुराने भूमि अवार्ड को लेकर है।
किसानों के अनुसार, वर्ष 1993-94 में सिंगला बांध के निर्माण के समय भराव क्षेत्र की करीब 2500 बीघा जमीन सिंचाई विभाग के नाम अवार्ड की गई थी। उस समय प्रभावित जमीन के लिए मुआवजे की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई थी।
किसानों का दावा है कि लंबे समय तक उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। इस दौरान जमीन से जुड़े नामांतरण, विरासत, खरीद-फरोख्त और केसीसी जैसे काम भी सामान्य रूप से होते रहे।
मोरसागर बांध की प्रक्रिया के दौरान सामने आया मामला
किसानों के मुताबिक, हाल के दिनों में मोरसागर बांध से जुड़ा निर्माण कार्य और आनासागर का अतिरिक्त पानी सिंगला बांध तक लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि जिस कृषि भूमि पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं, वह पहले ही भूमि अवार्ड की प्रक्रिया में शामिल की जा चुकी है।
इसके बाद प्रभावित किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। 25 जुलाई से सिंगला बांध पर धरना दिया जा रहा है। किसानों की प्रमुख मांग पुराने भूमि अवार्ड को निरस्त करना और जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट करना है।
मंत्री से भी हो चुकी है बातचीत
इस मामले में 2 अगस्त को जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। करीब दो घंटे तक चली चर्चा में किसानों ने अपनी समस्याएं और मांगें सामने रखीं।
मंत्री की ओर से भूमि अवार्ड निरस्त करने के मामले को मंत्रिमंडल के सामने रखने का आश्वासन दिया गया था। इसके साथ ही नामांतरण, विरासत और केसीसी से जुड़े कार्यों को पूर्व की तरह जारी रखने की बात भी कही गई थी।
प्रशासन ने मंत्री के निर्देश के बाद आंदोलनकारियों की ओर से दिए गए दो विरासत मामलों की प्रक्रिया शुरू कर उनका निस्तारण भी किया।
किसानों का साफ संदेश—लिखित समाधान तक आंदोलन जारी
इसके बावजूद किसान पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक भूमि अवार्ड निरस्त करने सहित उनकी सभी प्रमुख मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
इसी मांग को प्रशासन तक सीधे पहुंचाने के लिए किसानों ने ट्रैक्टर रैली के जरिए अजमेर कलेक्ट्रेट पहुंचने का फैसला किया था। हालांकि पुलिस द्वारा रैली रोके जाने के बाद अब प्रशासन और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत पर सबकी नजर है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बातचीत के जरिए किसानों और प्रशासन के बीच कोई सहमति बनती है या सिंगला बांध का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?

