चिकित्सा मंत्री खींवसर के बयानों पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत का तंज: "मंत्री जी इलाज करें या बयानबाजी?"
जोधपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी
जोधपुर की सियासत में स्वास्थ्य सेवाओं से ज्यादा इन दिनों स्वास्थ्य मंत्री के बयान चर्चा में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को जोधपुर में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पर ऐसा राजनीतिक इंजेक्शन लगाया कि सियासी तापमान अचानक बढ़ गया।
गहलोत का मंत्री खींवसर पर तंज
सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि जब से खींवसर स्वास्थ्य मंत्री बने हैं, उनके बयान लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से ज्यादातर बयान सरकार के लिए ही सिरदर्द बन रहे हैं। गहलोत ने चुटकी लेते हुए कहा कि वसुंधरा राजे सरकार में खींवसर एक सुलझे हुए मंत्री माने जाते थे, लेकिन इस बार उनकी बयानबाजी लोगों को हैरान कर रही है।
दरअसल, विवाद उस बयान से शुरू हुआ जिसमें स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर गंभीर और रेफर मरीज आते हैं, क्योंकि निजी अस्पतालों में इलाज महंगा होता है या वहां से जवाब मिल जाता है। मंत्री का यह तर्क विपक्ष को रास नहीं आया और गहलोत ने इसे संवेदनशील मामलों में गैर-जिम्मेदाराना बयान करार दिया।

बीजेपी सरकार को घेरा
गहलोत ने जोधपुर, कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और मौत के मामलों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि डेढ़ महीने बाद भी कोटा मामले की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। ऐसे मामलों में सरकार को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि जनता अस्पताल में इलाज के लिए जाती है, बहाने सुनने के लिए नहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि "यदि किसी प्रसूता की किडनी खराब हो जाती है तो उसका असर पूरी जिंदगी रहता है। ऐसे मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, न कि आंकड़ों और तर्कों की ओपीडी खोलनी चाहिए"

उधर बढ़ते विवाद और जनचिंता के बीच प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ देर रात जोधपुर पहुंचीं। उन्होंने एमडीएम और पावटा अस्पताल का निरीक्षण किया तथा भर्ती महिलाओं से मुलाकात की। प्रशासन का दावा है कि सभी मरीजों की हालत स्थिर है और मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत इलाज जारी है। अब सवाल यह है कि जनता को अस्पतालों से स्वास्थ्य का भरोसा मिलेगा या नेताओं के बयानों से सियासी बुखार ही बढ़ता रहेगा। फिलहाल राजस्थान की राजनीति में इलाज से ज्यादा चर्चा ‘इलाज पर दिए गए बयानों’ की हो रही है।
हाइलाइट्स
- गहलोत ने खींवसर की बयानबाजी पर उठाए सवाल
- प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामलों पर सरकार घिरी
- कोटा और बीकानेर घटनाओं को लेकर विपक्ष का हमला
- गायत्री राठौड़ ने अस्पतालों का किया निरीक्षण
- भर्ती प्रसूताओं की हालत फिलहाल स्थिर
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