राजस्थान में बारिश का ‘डबल अटैक’: दौसा-भरतपुर जलमग्न, बीकानेर की 15 अगस्त तैयारियों पर संकट
राजस्थान में तेज बारिश से दौसा और भरतपुर में जलभराव हो गया। बीकानेर में 15 अगस्त समारोह की तैयारियों पर असर की चिंता, प्रतापगढ़ में बांध के दो गेट खुले।
राजस्थान में मानसून की बारिश जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत दे रही है, वहीं कई शहरों में यही बारिश प्रशासनिक तैयारियों की परीक्षा ले रही है। बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई तेज बारिश के बाद सड़कों और प्रमुख इलाकों में पानी भर गया। दौसा में महज कुछ मिनट की बारिश ने जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी, तो भरतपुर में प्रशासनिक कार्यालयों के बाहर तक जलभराव हो गया। बीकानेर में लगातार बारिश ने 15 अगस्त के राज्य स्तरीय समारोह की तैयारियों को प्रभावित करने की चिंता बढ़ा दी है। वहीं प्रतापगढ़ में भंवर सेमला बांध का जलस्तर बढ़ने के बाद दो गेट खोलने पड़े।
दौसा में 15 मिनट की बारिश और शहर में पानी ही पानी
दौसा में बुधवार को हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। करीब 15 मिनट तक हुई झमाझम बारिश के बाद ही गांधी सर्किल और गांधी तिराहे जैसे व्यस्त इलाकों में पानी जमा हो गया। शहर का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र देखते ही देखते जलभराव की चपेट में आ गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी तेजी से सड़कों पर फैल गया। हालात ऐसे बने कि वाहन चालकों को पानी के बीच से निकलना पड़ा, जबकि पैदल राहगीरों को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
गांधी तिराहे जैसे शहर के महत्वपूर्ण हिस्से में थोड़ी देर की बारिश के बाद बने हालात ने नगर परिषद की मानसून पूर्व तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि यदि सामान्य बारिश में ही मुख्य सड़कें जलमग्न हो रही हैं, तो भारी बारिश की स्थिति में शहर के हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
भरतपुर में सरकारी दफ्तर भी जलभराव से अछूते नहीं
भरतपुर में भी बारिश के बाद कई प्रमुख इलाकों में जलभराव की स्थिति देखने को मिली। जिला मुख्यालय पर बारिश का असर इस कदर दिखाई दिया कि संभागीय आयुक्त कार्यालय और आईजी कार्यालय के आसपास भी पानी जमा हो गया।
यातायात सर्किल के सामने भी सड़क पर काफी पानी भर गया, जिससे वाहन चालकों को परेशानी हुई। कई स्थानों पर लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। प्रशासनिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में जलभराव ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। स्थानीय स्तर पर जल निकासी के इंतजामों को लेकर अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि बारिश के पानी को जल्द से जल्द निकालकर सामान्य यातायात बहाल किया जाए।
बीकानेर में बारिश ने बढ़ाई 15 अगस्त की चिंता
बीकानेर में तेज बारिश ने मौसम को तो सुहावना कर दिया, लेकिन जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। शहर में 15 अगस्त को राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह प्रस्तावित है और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं।
बारिश के चलते शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होने और लगातार मौसम खराब रहने से समारोह स्थल और आसपास की व्यवस्थाओं को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। प्रशासन के सामने अब चुनौती सिर्फ बारिश से निपटने की नहीं, बल्कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को समय पर दुरुस्त रखने की भी है।
प्रतापगढ़ में भंवर सेमला बांध के दो गेट खुले
प्रतापगढ़ में लगातार बारिश के कारण जलस्रोतों में पानी की आवक तेजी से बढ़ी है। जिले के प्रमुख भंवर सेमला बांध का जलस्तर बढ़कर 13.40 मीटर तक पहुंच गया। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए बांध के दो गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू की गई।
बांध से पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। जल बहाव वाले इलाकों में लोगों से सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
बारिश राहत भी, आफत भी
राजस्थान में मानसून की सक्रियता ने लंबे समय से गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को राहत दी है, लेकिन इसके साथ ही शहरों की जल निकासी व्यवस्था की असल तस्वीर भी सामने आ रही है। दौसा और भरतपुर में जलभराव, बीकानेर में समारोह की तैयारियों पर असर और प्रतापगढ़ में बांध का बढ़ता जलस्तर यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में प्रशासन को बारिश के साथ-साथ जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और लोगों की नजर अब मौसम विभाग के आगामी अलर्ट तथा स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर है।

