राजस्थान बॉर्डर पर बुलडोजर से क्यों मचा बवाल? ‘ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन’ पर आमने-सामने कांग्रेस-भाजपा, आखिर सच क्या है?

राजस्थान में भारत-पाक सीमा पर चल रहे 'ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन' को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। जानिए सीमावर्ती जिलों में कार्रवाई, विवाद और दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप की पूरी कहानी।

राजस्थान बॉर्डर पर बुलडोजर से क्यों मचा बवाल? ‘ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन’ पर आमने-सामने कांग्रेस-भाजपा, आखिर सच क्या है?

राजस्थान के भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में चल रहे ‘ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन’ ने अब सियासी रंग पकड़ लिया है। सीमावर्ती जिलों में अवैध अतिक्रमण और संदिग्ध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। जहां सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अभियान बता रही है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।

दरअसल, सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में सरकारी और चरागाह भूमि पर बने अवैध निर्माणों की पहचान कर उन्हें हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान कई धार्मिक स्थलों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसके बाद विवाद और गहरा गया। जैसलमेर में करीब 250 साल पुरानी महमूद शाह पीर जिलानी दरगाह को नोटिस मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बॉर्डर की सुरक्षा पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े स्थलों को बेहद कम समय देकर हटाने की कार्रवाई लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है। उनका कहना है कि अगर केंद्र सरकार के पास सीमा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस योजना है तो उसे सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा किया जाना चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि बिना पर्याप्त प्रक्रिया अपनाए लोगों को परेशान किया जा रहा है।

वहीं गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा सर्वोपरि है और 50 किलोमीटर के संवेदनशील क्षेत्र में यदि कोई भी अवैध अतिक्रमण सुरक्षा के लिए खतरा बनता है तो उसे हटाना सरकार की जिम्मेदारी है। बेढम ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

फिलहाल जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और फलोदी सहित सीमावर्ती जिलों में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सर्वे और सत्यापन अभियान चला रही हैं। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे धार्मिक आधार पर राजनीति करने की कोशिश करार दे रही है। ऐसे में ‘ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन’ अब सिर्फ प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि राजस्थान की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।