माउंट आबू की रहस्यमयी पांडव गुफा, जहां आज भी जलती है आस्था की ज्योति

माउंट आबू की पांडव गुफा महाशिवरात्रि पर आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां शिवलिंग स्थापित कर पूजा की थी। जानिए इस प्राचीन स्थल का इतिहास, धार्मिक महत्व और यहां की विशेष परंपराएं।

माउंट आबू की रहस्यमयी पांडव गुफा, जहां आज भी जलती है आस्था की ज्योति
Mount abu

माउंट आबू की पहाड़ियों में स्थित पांडव गुफा इन दिनों विशेष चर्चा में है। महाशिवरात्रि पर्व की शुरुआत के साथ ही यहां तीन दिनों तक देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। धार्मिक मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां साधना की थी।

पांच शिवलिंगों की स्थापना से जुड़ी मान्यता

गुफा के भीतर स्थापित पांच शिवलिंगों को पांडवों की आस्था का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इन शिवलिंगों की स्थापना स्वयं पांडवों ने की थी। गुफा परिसर में माता अर्बुदा और संकट मोचन हनुमान की उपस्थिति इस स्थल को और भी पवित्र बनाती है।

विलुप्त इतिहास से पुनर्जीवन तक का सफर

बताया जाता है कि यह प्राचीन स्थल हजारों वर्षों पुराना है। लंबे समय तक यह स्थान उपेक्षित रहा, बाद में महंत रतनगिरी ने इसका पुनरुद्धार कराया। आज उनके सम्मान में मंदिर परिसर में समाधि और प्रतिमा भी स्थापित है।

धूणी की अखंड ज्योति और तपोस्थली का स्वरूप

गुफा क्षेत्र में 24 घंटे धूणी जलती रहती है, जो साधना और तपस्या की परंपरा को दर्शाती है। पांडवों के बाद यह स्थान ऋषि-मुनियों की तपोभूमि के रूप में जाना जाने लगा। आज भी साधु-संत यहां प्रवास कर आध्यात्मिक साधना करते हैं।