राजस्थान में प्री-मानसून की दस्तक : अलर्ट मोड पर सरकार, सक्रिय हुए 77 बाढ़ नियंत्रण कक्ष

राजस्थान में प्री-मानसून गतिविधियों और ऑरेंज अलर्ट के बीच भजनलाल सरकार ने 77 जिला एवं ब्लॉक स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए हैं। 30 सितंबर तक 24 घंटे निगरानी, SDRF और स्टेट फ्लड सेल भी अलर्ट मोड पर रहेंगे।

राजस्थान में प्री-मानसून की दस्तक : अलर्ट मोड पर सरकार, सक्रिय हुए 77 बाढ़ नियंत्रण कक्ष
Rajasthan today weather

प्रदेश में मौसम के बदलते मिजाज और प्री-मानसून की धमाकेदार एंट्री के बीच भजनलाल सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। मौसम विभाग द्वारा राज्य के कई हिस्सों में 70-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ और भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी होने के तुरंत बाद प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 15 जून से पूरे राजस्थान में 77 जिला और ब्लॉक स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार राजस्थान में मानसून कुछ दिन की देरी से प्रवेश कर सकता है, लेकिन प्री-मानसून की गतिविधियां अत्यंत तीव्र रहने वाली हैं। इसी के मद्देनजर सरकार ने समय रहते इस सुरक्षा तंत्र को जमीन पर उतार दिया है।

30 सितंबर तक चौबीसों घंटे पैनी नजर -

सरकारी आदेश के अनुसार यह विशेष आपातकालीन व्यवस्था 15 जून से शुरू होकर आगामी 30 सितंबर 2026 (अथवा मानसून की विदाई तक) निरंतर प्रभावी रहेगी। आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन सभी 77 केंद्रों पर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और तकनीकी स्टाफ की तीन पारियों में राउंड-द-क्लॉक यानी 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। राजकीय अवकाश और रविवार के दिनों में भी ये नियंत्रण कक्ष बिना किसी रुकावट के चालू रहेंगे, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

स्टेट फ्लड सेल रखेगा लाइव मॉनिटरिंग -

राजधानी जयपुर में एक केंद्रीय 'स्टेट फ्लड सेल' स्थापित किया गया है, जो राज्य स्तरीय मुख्य नियंत्रण कक्ष के रूप में कार्य करेगा। यह सेल प्रतिदिन सुबह और शाम राज्य के सभी छोटे-बड़े बांधों के जलस्तर, जलभराव वाले क्षेत्रों की स्थिति और विभिन्न जिलों में हुई वर्षा के लाइव आंकड़े संकलित कर दैनिक बुलेटिन जारी करेगा। बीसलपुर, जवाई, माही बजाज सागर और राणा प्रताप सागर जैसे बड़े बांधों पर विशेष तौर पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

SDRF और सिविल डिफेंस की टीमें मुस्तैद -

आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियंत्रण कक्षों को सीधे स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और स्थानीय नागरिक सुरक्षा की रेस्क्यू टीमों से जोड़ा गया है। यदि किसी निचले इलाके में जलभराव या नदी-नालों में उफान के कारण ग्रामीण फंसते हैं, तो वायरलेस और हॉटलाइन के जरिए इसकी सूचना तुरंत रेस्क्यू टीम तक पहुंचेगी। सभी नियंत्रण कक्षों को पर्याप्त मात्रा में बचाव नौकाएं, लाइफ जैकेट, टॉर्च और मिट्टी के कट्टे तैयार रखने को कहा गया है।

कंट्रोल रूम की मुख्य जिम्मेदारियां:

लाइव सूचना : बांधों के गेट खोलने से पहले निचले इलाकों में मुनादी करवाकर अलर्ट जारी करना।

त्वरित राहत : जलभराव की स्थिति में भोजन पैकेट और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना।

कंट्रोल हेल्पलाइन : स्थानीय प्रशासन के माध्यम से आम जनता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करना ताकि लोग जलभराव की शिकायत दर्ज करा सकें।