TMC में बगावत तेज! काकोली घोष ने NDA के साथ जाने का किया दावा, लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की मांग

TMC सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने लोकसभा में अलग पहचान की मांग करते हुए NDA के साथ काम करने का दावा किया। जानिए बागी सांसदों के दावे, TMC की प्रतिक्रिया और पूरे राजनीतिक विवाद की पूरी कहानी।

TMC में बगावत तेज! काकोली घोष ने NDA के साथ जाने का किया दावा, लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की मांग

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी बगावत अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनका गुट संसद में अलग पहचान चाहता है और वह जल्द ही ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी’ के बैनर तले काम करेगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि उनका गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर काम करेगा।

काकोली घोष के इस बयान ने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। उनका दावा है कि उनके साथ लोकसभा के 22 सांसदों का समर्थन मौजूद है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसे TMC नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की मांग

ओम बिरला से मुलाकात के बाद काकोली घोष ने कहा कि उनके गुट ने लोकसभा में अलग बैठने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि उनका समूह अब अलग राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ना चाहता है और संसद में भी उसे उसी रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात से पहले बागी सांसदों के प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर भी बैठक हुई थी। इस बैठक ने बागी गुट और NDA के बीच बढ़ती नजदीकियों की अटकलों को और तेज कर दिया है।

TMC ने किया पलटवार

उधर, TMC नेतृत्व ने बागी सांसदों के दावों को खारिज करते हुए पार्टी की एकजुटता पर भरोसा जताया है। पार्टी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने पहुंचे। बैठक के बाद कीर्ति आजाद ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल सिर्फ सांसदों और विधायकों की संख्या से नहीं बनता।

उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने संघर्ष करके तृणमूल कांग्रेस को खड़ा किया है। पार्टी की पहचान और अस्तित्व उनसे जुड़ा हुआ है। इसलिए असली TMC वही है, जिसका नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं।"

अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को लिखा पत्र

इस राजनीतिक संकट के बीच TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि सदन में केवल तृणमूल कांग्रेस को ही एक मान्यता प्राप्त पार्टी के रूप में देखा जाए और किसी अन्य गुट को अलग पहचान न दी जाए।

पार्टी का कहना है कि कुछ सांसदों की नाराजगी के आधार पर TMC की पहचान या स्थिति को चुनौती नहीं दी जा सकती।

पार्टी में बढ़ता जा रहा है संकट

वर्तमान में TMC के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं। वहीं राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसदों में से 4 सांसद पहले ही इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ चुके हैं। ऐसे में लगातार बढ़ते असंतोष ने ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

बागी सांसदों के दावों के मुताबिक पहले 20 सांसद उनके साथ थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इससे पहले 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी सामने आया था, जिसने पार्टी में अंदरूनी संकट की चर्चाओं को और हवा दे दी थी।

सायोनी घोष ने साधी चुप्पी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच TMC की पूर्व युवा विंग अध्यक्ष सायोनी घोष और सांसद माला रॉय रविवार को कोलकाता से दिल्ली पहुंचीं। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान सायोनी घोष ने कहा, "मैं अभी कुछ नहीं कहूंगी। सही समय आने पर अपनी बात रखूंगी।"

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने हाल ही में सायोनी घोष और माला रॉय को पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया था। इसके बाद से ही उनके बागी गुट के संपर्क में होने की अटकलें तेज हो गई थीं।

बागी सांसदों की अगली रणनीति

बागी सांसद जगदीश बसुनिया ने बताया कि उनका समूह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करेगा और अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद बागी गुट अपनी अगली राजनीतिक रणनीति का खुलासा कर सकता है।

काकोली घोष के बेटे ने भेजा लीगल नोटिस

इसी बीच काकोली घोष दस्तिदार के बेटे बैद्यनाथ ने भी ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और उनकी मां के बारे में गलत राजनीतिक बयान दिए गए हैं। बैद्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी बारासात विधानसभा सीट से टिकट की मांग नहीं की थी।

TMC में जारी यह सियासी घमासान अब केवल पार्टी के भीतर का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर संसद की राजनीति और पश्चिम बंगाल की सत्ता समीकरणों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का रुख और बागी गुट की अगली रणनीति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।