Nirjala Ekadashi 2026: आज जरूर करें ये शुभ काम, श्रीहरि की कृपा से दूर होंगे कष्ट, मिलेगा अक्षय पुण्य
आज के दिन व्रत करने से आपके सारे काम पूरे हो जाएंगे, आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा। पूरी विधि को जानने के लिए आगे पढ़िए.....
"एक दिन का कठिन व्रत, पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य" — यही महिमा है निर्जला एकादशी की।
सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी एकादशी माना गया है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आने वाला यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन नियमपूर्वक व्रत करता है, उसे वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है।
क्यों खास है निर्जला एकादशी?
"निर्जला" अर्थात बिना जल के। इस दिन व्रती सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के पारण तक अन्न और जल दोनों का त्याग करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत व्यक्ति के पापों का नाश करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

निर्जला एकादशी पर जरूर करें ये शुभ कार्य
✅ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें।
✅ श्रीहरि को पीले पुष्प, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम और गीता का पाठ करें।
✅ गरीबों और जरूरतमंदों को जल, फल, छाता और वस्त्र का दान करें।
✅ शाम को भगवान विष्णु की आरती अवश्य करें।
✅ "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
निर्जला एकादशी का महा मंत्र
✨ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
यह मंत्र भगवान विष्णु का अत्यंत प्रभावशाली मंत्र माना जाता है। इसके जाप से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
एकादशी माता की आरती
???? ऊँ जय एकादशी माता, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता।।
???? तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी।।
???? नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्ल पक्ष रखी।
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।।
???? जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।।
श्रीहरि की दिव्य आरती
???? ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे।।
???? जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का।।
???? मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी।।
???? तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा।।
निर्जला एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि व्यास के कहने पर निर्जला एकादशी का व्रत रखा था। तभी से इसे "भीमसेनी एकादशी" भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से समस्त पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। निर्जला एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, दान-पुण्य और आरती करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यदि आप भी श्रीहरि की कृपा पाना चाहते हैं तो आज के दिन श्रद्धा भाव से व्रत और पूजा अवश्य करें।
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