राहुल गांधी और ऑपरेशन सिंदूर पर पोस्ट करना पड़ा था भारी? अब अमित मालवीय को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

राहुल गांधी और ऑपरेशन सिंदूर पर सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द कर दी। जानें पूरा मामला और अदालत का फैसला।

राहुल गांधी और ऑपरेशन सिंदूर पर पोस्ट करना पड़ा था भारी? अब अमित मालवीय को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

भाजपा के पूर्व आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को राहुल गांधी और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में बड़ी राहत मिली है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। यह मामला कांग्रेस पदाधिकारी की शिकायत के बाद दर्ज किया गया था। मालवीय ने अदालत में एफआईआर को चुनौती देते हुए इसे राजनीतिक मुद्दे पर की गई अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला बताया था।

किस पोस्ट को लेकर दर्ज हुई थी FIR?

यह पूरा मामला 20 मई 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमित मालवीय की ओर से साझा की गई एक पोस्ट से जुड़ा था। इस पोस्ट में राहुल गांधी और पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के चेहरों को जोड़कर बनाई गई एक तस्वीर साझा की गई थी।

मालवीय ने यह पोस्ट ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए साझा की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी पाकिस्तान और उसके समर्थकों की भाषा बोल रहे हैं। पोस्ट में उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए प्रधानमंत्री को बधाई क्यों नहीं दी।

कांग्रेस पदाधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस

पोस्ट को लेकर कांग्रेस पदाधिकारी श्रीधर एमएम ने अमित मालवीय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पोस्ट झूठी, दुर्भावनापूर्ण और भड़काऊ थी तथा इससे राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रति शत्रुता बढ़ सकती थी।

इस शिकायत के आधार पर 20 मई 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 192 और 353 के तहत मामला दर्ज किया था।

हाईकोर्ट में मालवीय ने क्या दलील दी?

अमित मालवीय ने एफआईआर को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से दलील दी गई कि सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक अभिव्यक्ति और सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर आलोचना का हिस्सा थी। उन्होंने आपराधिक कार्यवाही को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

इससे पहले 22 मई 2025 को जस्टिस एस. राचैया ने मामले में अंतरिम रोक लगाई थी। उस समय अदालत ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की थी कि आरोप भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 के तहत अपराध नहीं बनाते।

अब अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

16 अक्टूबर 2026 को जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने मालवीय की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और संबंधित कार्यवाही रद्द कर दी। इससे इस मामले में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई।

मालवीय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम. अरुणा श्याम और अधिवक्ता सुयोग हेरेले ई. अदालत में पेश हुए।

कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी, ऑपरेशन सिंदूर और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में है।