क्या फिर जयपुर बनेगा 'जलपुर'? प्री-मानसून बारिश ने खोली तैयारियों की पोल, पीके टाइम्स का रियलिटी चेक
राजस्थान में बारिश से पहले नगर निगम ने तैयारियां तो शुरू कर दी है लेकिन ग्राउंड पर क्या हालात हैं और किस किस तरीके की तैयारी की है वो देखिए...
जयपुर में मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी बाकी है, लेकिन प्री-मानसून की पहली तेज बारिश ने ही नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के कई इलाकों में जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों को पिछले वर्षों के वे हालात याद आने लगे हैं, जब बारिश के बाद जयपुर को 'जलपुर' कहा जाने लगा था।
सड़कों पर जमा पानी, जगह-जगह जाम और आमजन की परेशानी ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इस बार मानसून के दौरान जयपुर का क्या हाल होगा? हालांकि नगर निगम का दावा है कि इस बार हालात से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं और पूरे शहर को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष किए सक्रिय:
नगर निगम ने मानसून से पहले शहर के सात अलग-अलग जोन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। ये नियंत्रण कक्ष 15 जून से सक्रिय हो चुके हैं और मानसून समाप्त होने तक 24 घंटे कार्य करेंगे। इन नियंत्रण कक्षों के माध्यम से जलभराव, नालों की सफाई, सड़क पर पानी भरने और अन्य आपात स्थितियों की निगरानी की जाएगी। निगम प्रशासन का दावा है कि शिकायत मिलते ही संबंधित टीम मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू करेगी।
जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर:
मानसरोवर– 0141-2395566
मालवीय नगर– 0141-2755930
विश्वकर्मा फायर स्टेशन– 0141-2330080
खिरनी फाटक– 0141-8764880018
घाटगेट– 0141-261550
आमेर– 0141-2531282
कांवटिया सर्किल– 0141-2203518

आपदा प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम:
नगर निगम ने दावा किया है कि केवल कंट्रोल रूम ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक संसाधनों की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। प्रत्येक बाढ़ नियंत्रण कक्ष पर लगभग 15 हजार मिट्टी के कट्टे उपलब्ध रखे जाएंगे।
इसके अलावा तैयारी:
ट्रैक्टर-ट्रॉली
मड पंप
लाइफ जैकेट
नाव
अन्य बचाव उपकरण भी तैनात रहेंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया। नगर निगम के अनुसार सभी जोन कार्यालयों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। अधिशासी अभियंता नीरज मीणा के अनुसार किसी भी क्षेत्र से जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति की सूचना मिलते ही संबंधित टीम तत्काल मौके पर पहुंचेगी। वहीं अति आयुक्त नरेंद्र बंसल ने मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
निगम के दावे बनाम जमीनी हकीकत:
हालांकि सबसे बड़ा सवाल तैयारियों के दावों का नहीं, बल्कि उनके प्रभाव का है। जयपुर के लोग पिछले कई वर्षों से मानसून के दौरान जलभराव, ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था की समस्या झेलते रहे हैं। कई इलाकों में थोड़ी देर की बारिश भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है।
प्री-मानसून की पहली बारिश में ही सामने आई जलभराव की तस्वीरों ने निगम के दावों की परीक्षा शुरू कर दी है। अब लोगों की नजरें आगामी मानसून पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि क्या इस बार जयपुर की सड़कें तालाब बनने से बच पाएंगी या फिर राजधानी एक बार फिर 'जलपुर' के नाम से चर्चा में आएगी।
नगर निगम की तैयारियां कागजों पर मजबूत दिखाई दे रही हैं। कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन, संसाधन और अधिकारियों की तैनाती जैसे कदम जरूर सकारात्मक हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब लगातार बारिश होगी। अगर नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और त्वरित राहत तंत्र सही ढंग से काम करता है, तभी जयपुर को 'जलपुर' बनने से रोका जा सकेगा।
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