शिवसेना (UBT) में बगावत की चर्चा तेज, 9 में से 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की अटकलें

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अटकलों के बीच संजय राउत, प्रियंका चतुर्वेदी और उद्धव ठाकरे की प्रतिक्रिया ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।

शिवसेना (UBT) में बगावत की चर्चा तेज, 9 में से 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की अटकलें

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने पार्टी से अलग होने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने बुधवार सुबह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की इच्छा जताई है।

सूत्रों के मुताबिक, पत्र भेजने वाले सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, इससे पहले संजय दीना पाटिल सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज कर चुके थे और खुद को उद्धव ठाकरे का समर्थक बता चुके थे।

संजय राउत का तीखा हमला

दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कथित बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को दल बदलने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की गई है। राउत ने दावा किया कि कुछ सांसदों को करोड़ों रुपये का लालच दिया गया और उन्हें विशेष विमानों से दिल्ली लाया गया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

राउत ने कहा कि पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। बाद में अपने बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी भाषा मराठी राजनीतिक संस्कृति की सामान्य बोलचाल का हिस्सा है।

उद्धव ठाकरे सांसदों को साधने में जुटे

सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे और पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने 18 जून को दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई है और सभी सांसदों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि बैठक में अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने साधा निशाना

शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पार्टी ने अपने नाम और चुनाव चिन्ह के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पार्टी को और कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जनता ने सांसदों को नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व और पार्टी की विचारधारा को वोट दिया था। ऐसे में यदि किसी सांसद का पार्टी पर विश्वास नहीं रहा, तो उसे पहले इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

यदि 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की खबरें सही साबित होती हैं, तो यह शिवसेना (UBT) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। इससे पहले भी महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में विभाजन हो चुका है।

लगातार हो रही राजनीतिक टूट-फूट ने विपक्षी दलों के भविष्य और भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का रुख और दल-बदल कानून के तहत होने वाली कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।