मोदी-मैक्रों की मेगा मीटिंग, व्यापार से रक्षा तक बड़े समझौते, 5 साल में दोगुना होगा कारोबार

बैठक से पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स और उभरती तकनीकी कंपनियों को वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत से जोड़ना है

मोदी-मैक्रों की मेगा मीटिंग, व्यापार से रक्षा तक बड़े समझौते, 5 साल में दोगुना होगा कारोबार

फ्रांस के शहर नीस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात ने भारत-फ्रांस संबंधों को नई दिशा दे दी है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही रक्षा, परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

बैठक से पहले दोनों नेताओं ने ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स और उभरती तकनीकी कंपनियों को वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत से जोड़ना है। प्रधानमंत्री मोदी के यूरोप दौरे का पहला पड़ाव नीस रहा, जहां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।


बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे विषयों पर सकारात्मक बातचीत की जानकारी दी।

दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र बनाने, आर्थिक सुरक्षा संवाद शुरू करने और ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ लागू करने का फैसला किया है। फ्रांस पहले से ही यूरोपीय संघ में भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दोनों देश अब व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


रक्षा क्षेत्र में भी अहम प्रगति देखने को मिली। भारत की बहुप्रतीक्षित मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट परियोजना और राफेल विमानों की खरीद को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की रक्षा साझेदारी में ‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे देश में रक्षा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। महाराष्ट्र की जैतापुर परमाणु परियोजना सहित छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक नियमन, डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई के विस्तार, हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं, कौशल विकास और अनुसंधान से जुड़े कई समझौतों पर सहमति जताई। आईआईटी कानपुर में एरोनॉटिक्स स्किलिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं।

अंतरिक्ष क्षेत्र में मानव अंतरिक्ष मिशन और स्पेस मॉनिटरिंग को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने तथा शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और वैश्विक स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और फ्रांस के बीच हुई यह बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी का एक व्यापक खाका भी तैयार कर गई।


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