नई दिल्ली : 10 नवंबर 2025, को लाल किले के पास हुए कार बेम धमाके के बाद हुई जाँच में एक नई रणनीति का भयानक खुलासा हुआ है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने "वाइट कॉलर आतंक मॉड्यूल" नाम दिया है। इसमें पढ़े लिखे, प्रोफेशनल लोग, खास तौर पर डॉक्टर, आतंकवाद का हिस्सा बने पाए गए है। जांच में सामने आया की डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. आदिल राठर, डॉ. शाहीन आदि जैसे वैद्यकीय पेशे से जुड़े लोग इस मॉड्यूल का हिस्सा थे। इन्हीं के तार वाइट-कॉलर नेटवर्क से जुड़े पाए गए है।
पुलिस के अनुसार मॉड्यूल के कई सदस्यों को कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित किया गया था और इस दौरान उन्होंने 2016 के आसपास आतंकवादी विचारों का प्रभाव स्वीकार किया — जिससे यह मॉड्यूल आकार ले सका। जम्मू-काश्मीर पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि मॉड्यूल का नाम “अंसार इंटरिम” रखा गया था — जिसका उद्देश्य देशभर में विध्वंसक गतिविधियाँ करना था। इसके कई सदस्य पहले से ही रैडिकल विचारों में बंधे थे।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मॉड्यूल ने हजारों किलोग्राम विस्फोटक जमा किए थे और हिंसक योजनाओं को अंजाम देने की तैयारी थी — जिससे राजधानी और अन्य हिस्सों में बड़े हमले हो सकते थे।
फ़िलहाल इस मामले पर सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है:
NIA और पुलिस का कहना है की यह मॉड्यूल जीएमसी, एनसीआर और यूनिवर्सिटी जैसे पेशेवर वातावरण का उपयोग कर सुरक्षा जांच के दायरे में आने से बच रहा था।
एजेंसियां इस बड़े नेटवर्क की स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय कड़ियों की भी तह तक जांच कर रही है।

यह मामला आतंरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, इसमें शिक्षित और सम्मानित वर्ग भी शामिल हुए है, जो पारंपरिक तौर पर आतंकवाद से जुड़ने की धारणा से अलग है।