योगी मॉडल पर बंगाल में मदरसों की मैपिंग! अवैध संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी, बर्दवान ब्लास्ट कनेक्शन भी जांच के दायरे में

पश्चिम बंगाल में अवैध मदरसों पर सरकार जल्द एक्शन लेने वाली है, इसके लिए मदरसों से डिटेल ली जा रही है उसी के आधार पर आगे एक्शन होगा।

योगी मॉडल पर बंगाल में मदरसों की मैपिंग! अवैध संस्थानों पर कार्रवाई की तैयारी, बर्दवान ब्लास्ट कनेक्शन भी जांच के दायरे में

पश्चिम बंगाल में गैर-पंजीकृत और निजी मदरसों की पहचान और सत्यापन के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित मदरसों की विस्तृत मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया को उत्तर प्रदेश में अपनाए गए मॉडल की तर्ज पर देखा जा रहा है, जहां मदरसों की मान्यता, फंडिंग और संचालन की जांच की गई थी।

 

सरकार का कहना है कि जो संस्थान अपनी फंडिंग, पाठ्यक्रम, शिक्षकों और छात्रों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं कराएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर ऐसे संस्थानों को बंद करने या सरकारी भूमि पर बने अवैध ढांचों को हटाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

5 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

राज्य सरकार ने 5 जून को सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए 5 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट नबन्ना सचिवालय को भेजने को कहा है। सर्वे में तीन प्रमुख श्रेणियों को शामिल किया गया है—

✔ पूरी तरह गैर-पंजीकृत निजी मदरसे
✔ मान्यता प्राप्त लेकिन सरकारी सहायता से वंचित मदरसे
✔ राज्य सरकार से संबद्ध अन्य मदरसा संस्थान

रिपोर्ट मिलने के बाद गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों को निर्धारित समय सीमा में अपना पूरा ब्योरा देना होगा। ऐसा नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

यूपी मॉडल की तर्ज पर SIT की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, सरकार मदरसों की फंडिंग और वित्तीय स्रोतों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने पर भी विचार कर रही है। उत्तर प्रदेश में इसी तरह की जांच के बाद हजारों मदरसों की वैधता और फंडिंग को लेकर सवाल उठे थे।  "जो संस्थान नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।"

सुरक्षा एजेंसियों की नजर में क्यों अहम है यह सर्वे?

मदरसों की यह मैपिंग सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बर्दवान ब्लास्ट का संदर्भ

2014 के चर्चित बर्दवान (खगरागढ़) विस्फोट मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट में दावा किया था कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) ने कुछ स्थानों का इस्तेमाल कट्टरपंथी गतिविधियों और प्रशिक्षण के लिए किया था। हालांकि यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा है।

इसके अलावा केंद्रीय एजेंसियां समय-समय पर सीमा पार से संचालित नेटवर्क और अवैध गतिविधियों को लेकर राज्य सरकारों को अलर्ट जारी करती रही हैं।

बंगाल में मदरसों की मौजूदा तस्वीर

मदरसा श्रेणी संख्या स्थिति
सरकारी सहायता प्राप्त 628 शिक्षकों का वेतन और विकास मद राज्य सरकार देती है
मान्यता प्राप्त लेकिन बिना सहायता वाले 601 प्रत्यक्ष फंड नहीं, लेकिन स्थानीय विकास निधि के पात्र
गैर-पंजीकृत फॉर्मल मदरसे सर्वे जारी मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम के समान शिक्षा

 


क्या हैं 'फॉर्मल' और 'खारिजी' मदरसे?

फॉर्मल मदरसे

इन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान के साथ अरबी व धार्मिक अध्ययन भी पढ़ाया जाता है। ये राज्य शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम से जुड़े होते हैं।

खारिजी मदरसे

ये पारंपरिक धार्मिक संस्थान होते हैं, जो किसी औपचारिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध नहीं होते। इनका संचालन आमतौर पर मस्जिद समितियों, वक्फ संस्थाओं या धार्मिक संगठनों द्वारा किया जाता है।

मदरसा संचालकों की क्या है राय?

सरकार के इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ मदरसा संचालकों का कहना है कि यदि सरकार पारदर्शिता और छात्र कल्याण के उद्देश्य से जानकारी मांगती है तो सहयोग करने में कोई आपत्ति नहीं है।

"अगर पाठ्यक्रम, फंडिंग और छात्रों के हितों की समीक्षा होती है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।"

अब सभी की नजर 5 जुलाई को आने वाली जिला रिपोर्टों पर है। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर तय होगा कि राज्य में कितने मदरसे नियमों के दायरे में हैं और किन संस्थानों पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।

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