कोटा की दिव्यांशी ने रचा इतिहास, एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली राजस्थान की पहली वुशु खिलाड़ी बनीं
कोटा की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी का एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में चयन हुआ है। वह एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली राजस्थान की पहली वुशु खिलाड़ी बन गई हैं।
राजस्थान के खेल जगत के लिए गर्व का क्षण सामने आया है। कोटा की युवा वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी ने वह उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसका इंतजार लंबे समय से था। दिव्यांशी का चयन एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। इसके साथ ही वह राजस्थान की पहली ऐसी वुशु खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्हें एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है।
दिव्यांशी जल्द ही चीन के हुबेई प्रांत में आयोजित होने वाली एससीओ वुशु चैंपियनशिप में भी भारतीय दल का हिस्सा बनकर उतरेंगी। यह प्रतियोगिता 23 से 30 जून तक आयोजित हो रही है। इसके बाद भारतीय टीम के चयनित खिलाड़ियों के लिए चीन में विशेष प्रशिक्षण शिविर भी लगाया जाएगा, जहां एशियन गेम्स की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर लगातार रहा शानदार प्रदर्शन
दिव्यांशी पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने अलग-अलग आयु वर्गों में कुल 12 स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। सब-जूनियर, जूनियर, स्कूल गेम्स, खेलो इंडिया और फेडरेशन कप जैसी प्रतियोगिताओं में उनकी सफलता ने उन्हें देश की उभरती हुई वुशु खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया है।
पिछले वर्ष उन्होंने सीनियर वर्ग में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इससे पहले जूनियर विश्व वुशु चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बना चुकी हैं।
आसान नहीं था एशियन गेम्स तक का सफर
भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों को कई चरणों की चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। देशभर के खिलाड़ियों के बीच हुए लगातार ट्रायल्स में दिव्यांशी ने दमदार प्रदर्शन किया। श्रीनगर में आयोजित अंतिम चयन ट्रायल उनके करियर का सबसे अहम पड़ाव साबित हुआ।
60 किलोग्राम वर्ग में उतरते हुए उन्होंने कई मजबूत खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा। खास बात यह रही कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित खिलाड़ी रोशीबीना देवी को भी हराकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
14 किलो वजन घटाकर हासिल किया सपना
दिव्यांशी की सफलता के पीछे उनकी मेहनत और अनुशासन की बड़ी भूमिका रही। शुरुआती ट्रायल के दौरान उनका वजन निर्धारित वर्ग से काफी अधिक था। एशियन गेम्स में सीमित भार वर्ग होने के कारण उनके सामने चुनौती खड़ी हो गई थी।
इसके बाद उन्होंने फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया और कड़ी मेहनत के दम पर करीब 14 किलो वजन कम किया। इसी समर्पण ने उन्हें चयन की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाया और आखिरकार भारतीय टीम में जगह दिलाई।
खेल परिवार से जुड़ा है दिव्यांशी का सफर
दिव्यांशी वर्ष 2017 से कोटा स्थित महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। उनकी मां राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं, जबकि पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार के सहयोग और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनके खेल करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
अब एशियन गेम्स पर नजर
कोच और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि दिव्यांशी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की क्षमता है। अब उनकी नजर एशियन गेम्स 2026 पर है, जिसका आयोजन जापान में 22 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होगा। राजस्थान ही नहीं, पूरे देश को उनसे शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है।

