VLTD डिवाइस में 1000 करोड़ का घोटाला?, खाचरियावास का भजनलाल सरकार पर बड़ा आरोप

राजस्थान में VLTD डिवाइस की कीमत को लेकर कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने सवाल उठाए हैं। जानें 5,500 की रसीद और 15,500 की कथित वसूली का पूरा विवाद।

VLTD डिवाइस में 1000 करोड़ का घोटाला?, खाचरियावास का भजनलाल सरकार पर बड़ा आरोप

राजस्थान में कमर्शियल वाहनों में लगने वाली एक डिवाइस की कीमत अब बड़े राजनीतिक विवाद का विषय बन गई है। सवाल यह है कि जिस व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) को पहले करीब 5 हजार रुपये में लगवाने का दावा किया जा रहा है, उसके लिए अब वाहन मालिकों से 15 से 17 हजार रुपये तक क्यों लिए जा रहे हैं? यह सवाल उठाया है पूर्व परिवहन मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने। उन्होंने सोमवार को जयपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजस्थान की भाजपा सरकार पर VLTD डिवाइस लगाने की प्रक्रिया में 800 से 1000 करोड़ रुपये तक की कथित अनियमितताओं का गंभीर आरोप लगाया। खाचरियावास ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा से सार्वजनिक जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि सरकार को डिवाइस की वास्तविक कीमत, निर्धारित शुल्क, टेंडर प्रक्रिया और वाहन मालिकों से वसूली जा रही राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। हालांकि, खाचरियावास की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कथित घोटाले की राशि और वसूली में अंतर की जांच होना बाकी है।

5,500 की रसीद और ₹15,500 की वसूली? खाचरियावास ने उठाए सवाल – 

प्रेस वार्ता में खाचरियावास ने दावा किया कि VLTD डिवाइस लगाने के लिए कुछ वाहन मालिकों से लगभग 15,500 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जबकि रसीद पर करीब 5,500 रुपये की राशि दर्शाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रसीद और वास्तविक भुगतान में इतना बड़ा अंतर है, तो अतिरिक्त राशि किस मद में ली जा रही है और उसका हिसाब कहां है? खाचरियावास ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि डिवाइस की निर्धारित कीमत क्या है, उसकी वास्तविक लागत कितनी है और वाहन मालिकों से किस नियम के तहत अतिरिक्त राशि ली जा रही है। उन्होंने इस कथित अंतर को गंभीर बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

राजस्थान में 16 लाख से ज्यादा कमर्शियल वाहन होने का दावा - 

पूर्व परिवहन मंत्री ने कहा कि राजस्थान में 16 लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन हैं। इनमें टैक्सी, छोटे व्यावसायिक वाहन और बड़े कमर्शियल वाहन शामिल हैं। खाचरियावास के अनुसार, पहले VLTD डिवाइस लगभग 5 हजार रुपये में लगवाई जा सकती थी, लेकिन अब इसके लिए 15 से 17 हजार रुपये तक मांगे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि बड़ी संख्या में वाहन मालिकों से इस तरह अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है, तो मामला सैकड़ों करोड़ रुपये की संभावित अनियमितताओं से जुड़ सकता है। हालांकि, प्रदेश के सभी व्यावसायिक वाहनों पर एक समान शुल्क लागू होने या सभी वाहन मालिकों से अतिरिक्त वसूली होने की पुष्टि नहीं हुई है।

800 से 1000 करोड़ के संभावित घोटाले का आरोप - 

खाचरियावास ने VLTD डिवाइस लगाने की प्रक्रिया में लगभग 800 से 1000 करोड़ रुपये के संभावित घोटाले का आरोप लगाया। उनका कहना है कि डिवाइस की कथित कीमत और वाहन मालिकों से ली जा रही राशि में भारी अंतर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस पूरे मामले से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि डिवाइस की आपूर्ति करने वाली कंपनियां कौन हैं, डीलरों को किस प्रक्रिया के तहत अधिकृत किया गया है और वाहन मालिकों से कुल कितना शुल्क लिया जा सकता है। खाचरियावास ने कहा कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री भजनलाल और परिवहन मंत्री बैरवा से मांगा जवाब - 

कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा को इस मामले में जवाबदेह ठहराते हुए सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार चल रही है, तो उसे संबंधित दस्तावेज और शुल्क का विवरण सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। खाचरियावास ने सरकार से VLTD डिवाइस की खरीद, आपूर्ति, स्थापना और भुगतान से जुड़ी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनसे ली जा रही राशि किस आधार पर तय की गई है।

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का मुद्दा भी उठाया - 

VLTD डिवाइस पर सवाल उठाने के साथ खाचरियावास ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) से जुड़ी कथित अतिरिक्त वसूली का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि पहले भी नंबर प्लेट लगवाने के नाम पर वाहन मालिकों से अधिक राशि लिए जाने के सवाल उठे थे। खाचरियावास के अनुसार, उस समय वाहन मालिकों को राहत देने और अतिरिक्त पैसे वापस कराने की बात कही गई थी, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि अब VLTD डिवाइस के नाम पर वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

टैक्सी चालकों और छोटे ट्रांसपोर्टरों पर आर्थिक बोझ का मुद्दा - 

पूर्व परिवहन मंत्री ने कहा कि VLTD डिवाइस की कीमतों में कथित बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर छोटे वाहन मालिकों, टैक्सी चालकों और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि व्यावसायिक वाहन चलाने वाले कई लोग सीमित आमदनी में अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में अनिवार्य नियमों के अनुपालन के नाम पर उनसे अधिक राशि वसूलने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। खाचरियावास ने कहा कि सरकार का काम आमजन को राहत देना है, न कि नियमों के नाम पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाना।

क्या है VLTD डिवाइस, वाहनों में क्यों लगाई जाती है? - 

VLTD यानी व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस एक तकनीकी उपकरण है, जिसकी मदद से वाहन की लोकेशन और उसकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस तरह की तकनीक का उपयोग वाहनों की निगरानी और यात्री सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में किया जाता है। हालांकि, किसी वाहन के लिए डिवाइस लगवाना अनिवार्य है या नहीं, यह संबंधित वाहन श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करता है। इसी कारण खाचरियावास ने मांग की है कि सरकार डिवाइस की कीमत के साथ-साथ लागू नियमों, अधिकृत कंपनियों और निर्धारित शुल्क का विवरण भी सार्वजनिक करे।

कांग्रेस ने मामले को मजबूती से उठाने की चेतावनी दी - 

खाचरियावास ने कहा कि यह मामला वाहन मालिकों की मेहनत की कमाई से जुड़ा है और कांग्रेस इसे मजबूती से उठाएगी।

उन्होंने सरकार से तीन प्रमुख सवालों के जवाब मांगे -

1. VLTD डिवाइस की कीमत में कथित बढ़ोतरी क्यों हुई?

2. वाहन मालिकों से वसूली गई राशि का पूरा हिसाब क्या है?

3. अतिरिक्त भुगतान की शिकायतों पर जांच और राहत कब मिलेगी?

खाचरियावास ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितताएं साबित होती हैं, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। फिलहाल VLTD डिवाइस की कीमत और कथित अतिरिक्त वसूली को लेकर लगाए गए आरोपों पर सरकार तथा परिवहन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या डिवाइस की कीमत तथा शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया की जांच कराई जाती है।