राजस्थान में ग्राम पंचायतों का बड़ा पुनर्गठन, गांवों की सीमाएं बदलेगा कलेक्टर, जनता से मांगी जाएंगी आपत्तियां
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण प्रशासन के ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत कर दी है। राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों की सीमाएं बदलने, नई पंचायतें गठित करने और पुरानी सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने का पूरा अधिकार दे दिया गया है।
जयपुर। राजस्थान सरकार ने ग्रामीण प्रशासन के ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत कर दी है। राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों की सीमाएं बदलने, नई पंचायतें गठित करने और पुरानी सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने का पूरा अधिकार दे दिया गया है। यह फैसला 21 नवंबर 2025 को राजस्थान राजपत्र के विशेष अंक में अधिसूचना जारी कर लागू कर दिया गया है।
कलेक्टर अब करेंगे पंचायतों का सीमांकन
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अधिसूचना के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम-1994 की धारा 9, 10 और 101 के तहत राज्य सरकार के पास जो अधिकार थे, उन्हें अब जिला कलेक्टरों को सौंप दिया गया है। इसके तहत कलेक्टर अब ये काम कर सकेंगे:
- नई ग्राम पंचायतें बनाना या मौजूदा पंचायतों की सीमाएं बदलना
- प्रस्ताव तैयार कर उसे सार्वजनिक करना
- एक महीने तक जनता से आपत्ति-सुझाव मंगाना और उनकी सुनवाई करना
- अंतिम प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना
जनता की भागीदारी अनिवार्य
इस प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए जनता को पूरा अधिकार दिया गया है। कलेक्टर द्वारा तैयार प्रस्ताव को सार्वजनिक स्थानों, पंचायत भवनों और वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद कोई भी नागरिक 30 दिन के अंदर लिखित आपत्ति दर्ज करा सकेगा। सभी आपत्तियों की सुनवाई के बाद ही अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
दूदू पंचायत समिति में सबसे पहले बड़ा बदलाव
अधिसूचना में सबसे पहले जयपुर जिले की दूदू पंचायत समिति क्षेत्र की 20 ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है। इनकी नई सीमाएं और नाम इस प्रकार हैं:
- उरसेवा ग्राम पंचायत → उरसेवा, खेड़ीचरण, केरिया खुर्द, मुवालों की ढाणी
- धंधोली ग्राम पंचायत → धंधोली
- कचनारिया → कचनारिया, ईटाखोई, नगरी, गोठड़ा
- गहलोता → गहलोता, छिर्र
- मरवा → मरवा, आदरवा
- मोरडा → मोरडा, पानवाकलां, सुरीं
- गागरडू → गागरडू, गैगा
- लापोडिया → लापोडिया, सिनोदिया
- गैज़ी → गैज़ी, नोल्या, श्योपुरा, गोपीपुरा
- दांतरी → दांतरी, किला, माधोपुरा
- पडासौली → पडासौली
- नयागांव → नयागांव, जसुपुरा, पातुडी
- रहलाना → रहलाना
- केरिया बुजुर्ग → केरिया बुजुर्ग, महतगांव, बेनीखेड़ा
- सुनाडिया → सुनाडिया, छापरवाड़ा, तन छापरवाड़ा
- हरसौली → हरसौली
- चरासडा → चरासडा, श्रीरामनगर, छप्या
- मंमाणा → मंमाणा, खेडानागरान
- नीमली → नीमली, दांतडा, झकोलड, बोकडावास
- बिंगोलाव → बिंगोलाव, पवालिया, हटूपुरा
कब से लागू होंगी नई सीमाएं?
ये नई पंचायत सीमाएं आगामी पंचायती राज चुनाव के बाद ही प्रभावी होंगी। चुनाव पूरा होने के बाद पुरानी पंचायतें स्वतः समाप्त हो जाएंगी और नवगठित पंचायतें अपना कार्यभार संभाल लेंगी।
क्यों जरूरी था यह कदम?
- तेजी से बढ़ती आबादी और नए बसे गांव-ढाणियां
- कई गांव दो-तीन पंचायतों में बंटे होने से विकास योजनाओं में दिक्कत
- ग्रामीण क्षेत्रों में शहरीकरण के कारण सीमाओं में बदलाव की जरूरत
- सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए बेहतर प्रशासनिक इकाई जरूरी
राज्य सरकार के इस कदम से आने वाले समय में हजारों गांवों की प्रशासनिक सीमाएं बदल सकती हैं, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

