Udaipur में BJP नेताओं की जुबानी जंग, जोशी का तीखा पत्र

उदयपुर में भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच विवाद गहराया। धर्मनारायण जोशी ने मांगीलाल जोशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा पत्र लिखा, सियासी हलचल तेज।

Udaipur में BJP नेताओं की जुबानी जंग, जोशी का तीखा पत्र

उदयपुर की राजनीति में इन दिनों दो पुराने दिग्गजों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। उदयपुर मावली के पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मनारायण जोशी ने पार्टी के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी को एक कड़ा पत्र लिखा है।

इस पत्र में उन्होंने कई पुराने राज खोलते हुए मांगीलाल जोशी पर तीखे हमले किए हैं। धर्मनारायण जोशी ने लिखा कि मांगीलाल ने अपने स्वार्थ के लिए कई बार समझौते किए, लेकिन उनका 'राजनीतिक कुंवारापन' आज तक खत्म नहीं हुआ, यानी वे कभी जनता के प्रतिनिधि नहीं बन पाए।

धर्मनारायण जोशी ने पत्र में सबसे गंभीर आरोप विप्र फाउंडेशन के कार्यक्रमों को लेकर लगाया है। उन्होंने लिखा कि मांगीलाल जोशी अपनी सुविधा के हिसाब से समाज के कार्यक्रमों में आते रहे। वे मंच पर बैठे, भाषण दिए और भोजन करके चले गए, लेकिन आज तक उन्होंने विप्र कार्यक्रमों में एक रुपए का भी सहयोग नहीं दिया। लाखों रुपए खर्च करके जो आयोजन किए जाते हैं, उनमें मांगीलाल जोशी ने कभी अपनी ओर से या किसी और से 100 रुपए तक की मदद नहीं करवाई।

1998 की हार और भाजपा में बिखराव की कहानी

लेटर में धर्मनारायण जोशी ने 1998 के विधानसभा चुनाव की याद दिलाते हुए लिखा कि मांगीलाल जोशी अपने अति-आत्मविश्वास और गलत व्यवहार के कारण चुनाव हारे थे। उन्होंने तब प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को हल्का समझा और कई विवादित लोगों से हाथ मिलाया।

चुनाव हारने के बाद उन्होंने अपनी हार का ठीकरा धर्मनारायण जोशी, शिवकिशोर सनाढ्य, किरण माहेश्वरी और प्रमोद सामर पर फोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने महिला बैंक के चुनाव में किरण माहेश्वरी को हराकर अपना बदला लिया। धर्मनारायण का दावा है कि यहीं से उदयपुर भाजपा में जो बिखराव शुरू हुआ, वह आज तक नहीं थमा है।

पार्षद तक नहीं बन पाने पर तंज

धर्मनारायण जोशी ने मांगीलाल जोशी की तुलना उस 'फौजमार सेनापति' से की, जो अपनी पूरी सेना को शहीद करवा देता है, लेकिन उसे कोई पछतावा नहीं होता। उन्होंने लिखा कि मांगीलाल ने विधायक, यूआईटी अध्यक्ष और पार्षद जैसे पदों के लिए कई समझौते किए, लेकिन ईश्वर ने उनकी पार्षद बनने तक की इच्छा पूरी नहीं होने दी। उन्होंने कटाक्ष किया कि अगर वे पार्षद भी बन जाते, तो कम से कम उनका राजनीतिक कुंवारापन खत्म हो जाता।

टिकट कटवाने की राजनीति और आपातकाल का राज

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि मांगीलाल जोशी ने 2008, 2013 और 2018 में धर्मनारायण जोशी का टिकट कटवाने के लिए खूब भाग-दौड़ की। वे टिकट कटवाने के लिए बैठकों और हस्ताक्षर अभियान में सबसे आगे रहे।

धर्मनारायण ने आपातकाल का जिक्र करते हुए लिखा कि जब संघ पर पाबंदी लगी थी, तब मांगीलाल जोशी संघर्ष करने के बजाय नौकरी करने गांव चले गए थे। उन्होंने मदनलाल मूंदड़ा के साथ किए गए अभद्र व्यवहार को लेकर भी मांगीलाल को घेरा और कहा कि उन्हें 'गुरुजी' कहना भी इस शब्द का अपमान है।

डॉक्टर से इलाज कराने की दी सलाह

जोशी ने पत्र के आखिर में काफी सख्त लहजे में लिखा कि मांगीलाल जोशी की पूरी जिंदगी बस किसी तरह कोई पद पाने की धुन में निकल गई। उन्होंने नसीहत दी कि अपनी गलतियों और असफलताओं की वजह से जो तनाव उनके मन में है, उसे कम करने के लिए वे बयानबाजी करने के बजाय किसी अच्छे डॉक्टर से अपना इलाज करवाएं। इस पत्र के सामने आने के बाद उदयपुर भाजपा के साथ-साथ पूरे राजनीतिक गलियारे में इस विवाद की चर्चा जोरों पर है।