SIR से सड़क तक सियासी टकराव, सुप्रीम कोर्ट में आज चार मामलों पर सुनवाई; अभिजीत दीपके ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में आज राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं और असदुद्दीन ओवैसी की SIR याचिकाओं पर सुनवाई है। दिल्ली प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और मेट्रो प्रतिबंध के मामले भी सूचीबद्ध हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। चुनाव प्रक्रिया पर विपक्ष के सवालों के बीच अदालत में आज चार अलग-अलग मामलों पर सुनवाई होनी है। इनमें राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की SIR के खिलाफ अर्जी, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए घटनाक्रम से जुड़े मामले शामिल हैं। इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दो युवा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है।
अभिजीत दीपके बोले- बदलाव के लिए लड़ने वाले जेल में
अभिजीत दीपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि दोनों युवाओं को गिरफ्तार हुए तीन दिन हो चुके हैं। दीपके के मुताबिक, दोनों ने बदलाव के लिए काम करने के उद्देश्य से अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़ी थी। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज लहराने के लिए जेल में डाले जाने का सवाल भी उठाया।
दरअसल, 13 अक्टूबर को रांका और दास जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर गेट पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हुए थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मजिस्ट्रेट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनकी गिरफ्तारी को लेकर दीपके ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी समेत 13 नेताओं की याचिका पर नजर
सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी समेत विपक्ष के 13 नेताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई होनी है। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाए हैं। 12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च भी किया था। अब इस विवाद से जुड़ी मांगों पर अदालत में सुनवाई होनी है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी SIR के खिलाफ याचिका दाखिल की है। उनकी मांग है कि इस प्रक्रिया को रद्द किया जाए। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उससे जुड़े कानूनी सवाल अहम रहेंगे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई भी अदालत के सामने
सुनवाई का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई है। इस मामले में हिरासत, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध और महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों की अवमानना किए जाने का आरोप भी लगाया है।
दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में इन आरोपों के जवाब में कहा है कि किसी को अदालत के निर्देशों के विपरीत अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ की गई। पुलिस ने यह भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवर लोगों को अपना काम करने से नहीं रोका गया।
सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर भी याचिका
आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध एक अन्य मामले में विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट मार्च और अदालत परिसर में हुए घटनाक्रम पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर का राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुआ और इस मामले में अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए। इन आरोपों पर अदालत का रुख सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण रहेगा।
वहीं, CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने सुनवाई से पहले मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। ब्रिटास ने कहा कि उन्होंने पत्र में अपने साथ हुई घटनाओं का विवरण दिया था और अदालत ने उसे अंतरिम याचिका के रूप में लिया।
अब अदालत की सुनवाई पर टिकी निगाहें
SIR की वैधता और प्रक्रिया से जुड़े सवालों के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान नागरिकों के अधिकार, पुलिस की कार्रवाई और अदालत के आदेशों के पालन का मुद्दा भी सुनवाई में सामने है। एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग और SIR को लेकर जवाब मांग रहा है, तो दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है।
ऐसे में आज की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं कि इन अलग-अलग याचिकाओं पर अदालत आगे किस तरह की कानूनी प्रक्रिया अपनाती है। फिलहाल सुनवाई के नतीजे को लेकर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले अदालत की टिप्पणियों और आदेशों का इंतजार करना होगा।

