अजमेर में BJP को बड़ा झटका! पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने छोड़ी पार्टी, देवनानी पर लगाए गंभीर आरोप
अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने DLB के दो नोटिस और वासुदेव देवनानी से राजनीतिक मतभेद को वजह बताया।
Ajmer Politics News: राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले अजमेर की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। अजमेर नगर निगम के दो बार मेयर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। गहलोत ने अपने फैसले के पीछे स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से हाल ही में जारी किए गए दो नोटिस को वजह बताया है।
इस्तीफे के साथ गहलोत ने भाजपा की ओर से उन्हें दिए गए नागौर नगर परिषद चुनाव प्रभारी के दायित्व से भी मुक्त करने की मांग की है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर राजनीतिक दबाव बनाने और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर नोटिस जारी करवाने का आरोप लगाया।
दो नोटिस के बाद लिया इस्तीफे का फैसला
धर्मेंद्र गहलोत के मुताबिक, स्वायत्त शासन विभाग ने 18 अगस्त को दो अलग-अलग मामलों में उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गहलोत का कहना है कि इनमें से एक शिकायत वर्ष 2021 की है, जब वह अजमेर के मेयर नहीं थे, जबकि दूसरा मामला उनके मेयर कार्यकाल से जुड़ा है और कई साल पुराना है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह के नोटिस जारी होने से उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके और देवनानी के बीच चल रहे राजनीतिक मतभेद का असर भाजपा पर पड़े।

देवनानी से राजनीतिक मतभेद का दावा
पूर्व मेयर ने अपने वीडियो में वासुदेव देवनानी के साथ राजनीतिक और वैचारिक मतभेद होने की बात कही। उनका आरोप है कि लंबे समय से उन्हें राजनीतिक रूप से दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।
गहलोत ने कहा कि अगर निकाय चुनाव के दौरान कांग्रेस इन मामलों को मुद्दा बनाती है तो इससे भाजपा को भी सवालों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
हालांकि, गहलोत की ओर से लगाए गए आरोपों पर देवनानी या भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
बोले- 'मिटने को तैयार, झुकने को नहीं'
इस्तीफे के ऐलान के दौरान धर्मेंद्र गहलोत ने काफी तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
गहलोत ने देवनानी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि उन्होंने अभी उन्हें ठीक से पहचाना नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के शिष्य हैं, जिन्होंने कभी किसी के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि देवनानी और उनके बीच की राजनीतिक लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। साथ ही भाजपा से इस्तीफा देने के फैसले के लिए पार्टी से माफी भी मांगी।
दो बार अजमेर के मेयर रह चुके हैं गहलोत
धर्मेंद्र गहलोत अजमेर नगर निगम के दो बार महापौर रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2005 और 2015 में मेयर का पद संभाला था। भाजपा ने आगामी नागौर नगर परिषद चुनाव को लेकर उन्हें प्रभारी की जिम्मेदारी भी दी थी।
अब इस्तीफे के बाद उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से नागौर चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी से भी उन्हें मुक्त करने की मांग कर दी है।
पुराने कॉमर्शियल नक्शा मामले का भी जिक्र
गहलोत के मेयर कार्यकाल से जुड़ा करीब छह साल पुराना 13 कॉमर्शियल नक्शों की मंजूरी का मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में तत्कालीन महापौर को राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 39 के तहत नोटिस जारी किया गया था।
आरोप था कि नियमों के विपरीत नगर निगम के उपायुक्त के जरिए 13 कॉमर्शियल नक्शों से जुड़ी फाइलों को मंजूरी दिलाई गई। शिकायत के बाद तत्कालीन एडीएम सिटी अशोक योगी की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई थी।
गहलोत ने इस पुराने मामले को भी मौजूदा नोटिस से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति जताई है। फिलहाल दोनों नोटिसों पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया क्या रहती है, इस पर नजर बनी हुई है।

