कांग्रेस की हार के बाद झारखंड में नई सियासी बिसात, हेमंत सोरेन के सामने NDA का प्रस्ताव

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में क्रॉस-वोटिंग के चलते कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत के बाद सरयू राय ने हेमंत सोरेन को कांग्रेस से अलग होकर सरकार चलाने का प्रस्ताव दिया।

कांग्रेस की हार के बाद झारखंड में नई सियासी बिसात, हेमंत सोरेन के सामने NDA का प्रस्ताव
Hemant soren

झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। क्रॉस-वोटिंग के चलते कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी जीत दर्ज करने में सफल रहे। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद महागठबंधन के भीतर असंतोष और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

इसी बीच जेडीयू विधायक और एनडीए नेता सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक राजनीतिक प्रस्ताव देते हुए कहा कि वे कांग्रेस को सरकार से बाहर कर एनडीए के सहयोग से सरकार चलाने पर विचार करें।

सरयू राय का बड़ा बयान

राज्यसभा चुनाव के बाद प्रतिक्रिया देते हुए सरयू राय ने कहा कि महागठबंधन के भीतर दरार साफ दिखाई दे रही है और यह गठबंधन कभी भी टूट सकता है। उनका कहना था कि हेमंत सोरेन यदि कांग्रेस से अलग होकर सरकार चलाना चाहें तो उन्हें एनडीए का सहयोग मिल सकता है। उन्होंने दावा किया कि निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत की संभावना पहले से ही दिखाई दे रही थी।

क्या बिना कांग्रेस और बीजेपी के सरकार चल सकती है?

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास फिलहाल 34 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी से अलग रहकर सरकार चलाने के लिए हेमंत सोरेन को सात अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी।

राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो आरजेडी के चार विधायक, भाकपा (माले) के दो विधायक और सरयू राय का एक समर्थन मिल जाए तो बहुमत का आंकड़ा पूरा हो सकता है। हालांकि यह केवल संभावित गणित है, जिस पर अभी किसी तरह की औपचारिक चर्चा सामने नहीं आई है।

महागठबंधन में बढ़ी नाराजगी

कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद गठबंधन सहयोगियों पर सवाल उठने लगे हैं। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने चुनाव परिणाम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी को अपने ही सहयोगी दलों का पूरा समर्थन नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सहयोगी दलों के विधायकों ने अपेक्षित मतदान नहीं किया, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।

कैसे बदला चुनाव का गणित?

झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में थे। एक सीट पर जेएमएम के बैद्यनाथ राम जीतने में सफल रहे, जबकि दूसरी सीट पर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत हासिल की।

महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। चुनावी गणित के अनुसार उन्हें जीत के लिए पर्याप्त वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन वास्तविक मतदान में उन्हें केवल 20 वोट हासिल हुए। दूसरी ओर एनडीए समर्थित उम्मीदवार को अपेक्षा से अधिक वोट मिले, जिससे क्रॉस-वोटिंग की चर्चाओं को बल मिला।

नतीजों के बाद बढ़ी राजनीतिक अटकलें

राज्यसभा चुनाव के परिणाम ने झारखंड की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दे दिया है। फिलहाल हेमंत सोरेन या जेएमएम की ओर से सरयू राय के प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चुनाव नतीजों ने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।