पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन टला, आग की घटना ने बढ़ाई चिंता

Pachpadra रिफाइनरी का उद्घाटन टला। Narendra Modi के दौरे से पहले CDU यूनिट में आग, जांच शुरू।

पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन टला, आग की घटना ने बढ़ाई चिंता

Pachpadra स्थित बहुप्रतीक्षित रिफाइनरी का उद्घाटन एक बार फिर टल गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi को 20 अप्रैल को इसका लोकार्पण करना था, लेकिन इससे एक दिन पहले ही मुख्य CDU यूनिट में आग लगने की घटना ने पूरे कार्यक्रम को रोक दिया। आग इतनी भीषण थी कि धुएं के गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिए।

हादसे के कारणों की जांच शुरू

जिस यूनिट में आग लगी, उसी के पास प्रधानमंत्री का कार्यक्रम प्रस्तावित था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हीट एक्सचेंजर यूनिट के एक वॉल्व से हाइड्रोकार्बन रिसाव इस हादसे की वजह माना जा रहा है।

13 साल से लंबित परियोजना

इस रिफाइनरी की शुरुआत की कहानी 2004 में बाड़मेर के मंगला क्षेत्र में क्रूड ऑयल की खोज से जुड़ी है। 2009 में उत्पादन शुरू होने के बाद रिफाइनरी परियोजना की योजना बनी। वर्ष 2013 में तत्कालीन सरकार के दौरान इसका शिलान्यास हुआ था, लेकिन राजनीतिक बदलाव और अन्य कारणों से काम प्रभावित होता रहा।

लागत में भारी बढ़ोतरी

शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपये तय की गई थी, जो समय के साथ बढ़कर लगभग 79 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि देरी के चलते लागत में आगे भी इजाफा हो सकता है।

 देश की बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी में शामिल

यह रिफाइनरी देश की प्रमुख ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड परियोजनाओं में गिनी जाती है, जिसकी सालाना क्षमता करीब 9 मिलियन मीट्रिक टन है। इसे बाड़मेर के मंगला टर्मिनल और Mundra Port से पाइपलाइन के जरिए जोड़ा गया है। यहां पेट्रोल-डीजल के साथ कई पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे।

स्थानीय विकास पर पड़ा असर

इस परियोजना से आसपास के गांवों में रोजगार और बुनियादी सुविधाओं में सुधार देखने को मिला है। हालांकि बार-बार हो रही देरी और ताजा हादसे ने स्थानीय लोगों की उम्मीदों को झटका दिया है। फिलहाल सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और नए उद्घाटन कार्यक्रम पर टिकी हैं।