प्रदेश के 309 शहरों में आज से सजेंगे ‘शहरी सेवा शिविर’, नियमों में ढील के साथ मिलेंगी 12 बड़ी छूट
राजस्थान में 12 जून से 15 जुलाई 2026 तक शहरी सेवा शिविर और ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित होंगे। पट्टा, नामांतरण, फ्रीहोल्ड, भू-उपयोग परिवर्तन समेत कई कार्यों का मौके पर निस्तारण किया जाएगा।
प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले मध्यम और कमजोर वर्ग के लोगों को अपने मकान और भूखंड का मालिकाना हक (पट्टा) दिलाने के लिए राज्य सरकार आज यानी 12 जून से ‘शहरी सेवा शिविर-2026’ का बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। आगामी 15 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत सूबे के सभी 309 शहरों में वार्ड-वार शिविरों का आयोजन किया जाएगा। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग ने आम जनता को राहत देने के लिए नियमों का सरलीकरण करते हुए 12 तरह की बड़ी छूटों का एलान किया है। इस बार अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि फाइलों को बेवजह अटकाने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए ‘मौका निरीक्षण’ (फिजिकल वेरिफिकेशन) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही किसी भी भूखंड या कॉलोनी पर आने वाली आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा को 15 दिन से घटाकर मात्र 7 दिन कर दिया गया है, ताकि आवेदकों को मौके पर ही सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए ई-पट्टा जारी किया जा सके।
एक ही छत के नीचे सभी काम :
शिविर 12 जून से 15 जुलाई 2026 तक चलेंगे। जयपुर विकास प्राधिकरण, सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में इनका संचालन होगा। पट्टा, फ्री-होल्ड, नाम हस्तांतरण (म्यूटेशन), भू-उपयोग परिवर्तन और भवन निर्माण स्वीकृति एक ही छत के नीचे मिलेगा। किराएदारों को राहत देते हुए 40 वर्गगज तक की पुरानी किराए की दुकानों का भी नियमन होगा।
कमजोर और मध्यम वर्ग को लीज शुल्क में बड़ी राहत -
सरकार ने भूखंड के आकार के अनुसार लीज होल्ड और नियमन शुल्क में भारी कटौती की है। 100 वर्गमीटर तक के प्लॉट में लीज शुल्क में 50 प्रतिशत की सीधी छूट। 200 वर्गमीटर तक के प्लॉट में लीज शुल्क में 40 प्रतिशत की राहत। 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट में लीज शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट। यह छूट केवल कमजोर और मध्यम आय वर्ग के लिए प्रभावी होगी, उच्च आय वर्ग को पूर्व निर्धारित दरें ही देनी होंगी।)
निर्माण शर्तों में ढील : बाहरी क्षेत्रों में 10% निर्माण पर भी नियमन -
मास्टर प्लान के तहत कॉलोनियों के नियमन के लिए निर्माण की शर्तों को बेहद व्यावहारिक बनाया गया है। अब 'अर्बन-1' (मुख्य शहर के नजदीकी) क्षेत्रों में स्थित कॉलोनियों में यदि 60 प्रतिशत निर्माण हो चुका है, तो पूरी कॉलोनी का नियमन हो जाएगा। वहीं, 'अर्बन-2' (शहर के बाहरी/आउटर) क्षेत्रों में मात्र 10 प्रतिशत निर्माण होने पर भी विकास समितियां नियमन के लिए पात्र मानी जाएंगी। इसके अतिरिक्त वर्ष 2013 से पहले बसी कॉलोनियों का नियमन आवासीय या डीएलसी (DLC) रेट (जो भी अधिक हो) के महज 25 प्रतिशत शुल्क पर किया जाएगा।
इन भूमियों पर रहेगा प्रतिबंध -
नगरीय विकास विभाग के सख्त निर्देशों के मुताबिक 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों पर बसी कॉलोनियों का नियमन इन शिविरों में नहीं किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी चारागाह, ड्रेनेज, नदी-नालों के बहाव क्षेत्र की भूमि और न्यायालयों के स्थगन आदेश (Stay Order) से प्रभावित संपत्तियों को इस अभियान से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
इन दस्तावेजों के साथ करें आवेदन -
शिविर में भाग लेने वाले नागरिकों को अपने साथ गृह निर्माण सहकारी समिति का मूल आवंटन पत्र (अलॉटमेंट लेटर), सोसाइटी की रसीद, साइट प्लान (नक्शा), कब्जा पत्र (पजेशन लेटर), आधार या जन आधार कार्ड और भूखंड के आगे-पीछे व निर्माण की तस्वीरें साथ लानी होंगी। यदि भूखंड किसी अन्य व्यक्ति से खरीदा गया है, तो 100-500 के स्टांप पर नोटरीशुदा चेन-डीड प्रस्तुत करनी होगी।
ग्राम पंचायतों में भी लगेंगे ग्रामीण सेवा शिविर -
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा एवं निर्देशों की अनुपालना में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को राज्य सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी एवं फ्लैगशिप योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए 12 जून से 15 जुलाई तक "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" का आयोजन किया जाएगा। महाअभियान के तहत राजस्व विभाग के अतिरिक्त 21 अन्य महत्वपूर्ण विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री शर्मा के निर्देशानुसार शिविर में आने वाले प्रत्येक नागरिक का कार्य उसी दिन पूर्ण करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। अभियान की पारदर्शिता और दैनिक प्रगति पर नजर रखने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी संचार विभाग द्वारा ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है।
इसमें विभागीय कार्यों की दैनिक प्रगति रिपोर्ट इस पोर्टल पर शिविर प्रभारी के माध्यम से अनिवार्य रूप से अपडेट की जाएगी। इसके साथ ही, अभियान के दौरान निष्पादित होने वाले सभी दस्तावेजों व प्रमाण-पत्रों पर "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" की विशेष मोहर अंकित की जाएगी। अभियान में स्थानीय स्तर पर सांसदों, विधायकों, जिला प्रमुखों, प्रधानों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग की और से सभी जिला कलक्टर को निर्देशित किया गया है। शिविर में राजस्व विभाग को अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है। विभाग द्वारा राजस्व अभिलेखों एवं खातों का शुद्धिकरण, खातों का विभाजन, रास्तों संबंधी प्रकरणों का निस्तारण, नामांतरण (म्यूटेशन), सरकारी एवं चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने, भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन, खातेदारी अधिकार प्रदान करने, सीमाज्ञान, आबादी विस्तार एवं विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्र जारी करने की कार्यवाही की जाएगी।
Saloni Kushwaha 
