सबरीमाला मंदिर महिला प्रवेश विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 9वें दिन सुनवाई

सबरीमाला मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी। AIMPLB और वकीलों ने धार्मिक परंपराओं पर रखीं दलीलें।

सबरीमाला मंदिर महिला प्रवेश विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 9वें दिन सुनवाई

केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित अन्य संप्रदायों के धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। आज सुनवाई का 9वां दिन है।

मस्जिद दरगाह में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ दलील दे रहे एडवोकेट निजाम पाशा ने कहा कि कोई व्यक्ति हिजाब को धार्मिक रूप से अनिवार्य मान सकता है, लेकिन स्कूल के नियम अलग हो सकते हैं। मतलब धार्मिक विश्वास हमेशा संस्थागत नियमों से ऊपर नहीं होगा।

अगर किसी मोहल्ले की मस्जिद सबके लिए खुली हो तो भी कोई जाकर घंटी नहीं बजा सकता। आरती नहीं कर सकता, क्योंकि उस जगह की अपनी धार्मिक मर्यादा है। कुरान बहुत संक्षिप्त है। उसमें हर प्रथा डिटेल में नहीं लिखी। पैगंबर की परंपरा भी धार्मिक प्रथा का हिस्सा है। मतलब सिर्फ किताब में लिखा होना ही ‘जरूरी अधिकार’ तय नहीं करता।

23 अप्रैल को पिछली सुनवाई में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने कोर्ट से कहा था कि इस्लाम महिलाओं को नमाज के लिए मस्जिद आने से नहीं रोकता, लेकिन यह बेहतर है कि वे घर पर ही इबादत करें।

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से 22 अप्रैल तक सुनवाई हुई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।