42 घंटे धरना, जीरो FIR पर ‘ना’! डोटासरा ने खुद के नारे रुकवाए, राहुल गांधी जिंदाबाद पर दिया जोर

जयपुर में रितु बराला मामले में जीरो FIR की मांग को लेकर कांग्रेस का 42 घंटे का धरना खत्म हो गया। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने डोटासरा को लिखित जवाब सौंपा, लेकिन जीरो FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया।

42 घंटे धरना, जीरो FIR पर ‘ना’! डोटासरा ने खुद के नारे रुकवाए, राहुल गांधी जिंदाबाद पर दिया जोर

जयपुर में कांग्रेस का 42 घंटे का धरना खत्म हो गया, लेकिन सियासी कहानी में ट्विस्ट बाकी है। रितु बराला मारपीट मामले में कांग्रेस जीरो FIR की मांग लेकर पुलिस कमिश्नरेट में डटी रही। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने आखिरकार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लिखित जवाब सौंपा, लेकिन मांग मानने के बजाय जीरो FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। यानी कांग्रेस की लंबी पहरेदारी के बाद हाथ आया एक पत्र और साथ में नए सवाल!

 42 घंटे की सियासी पहरेदारी, नतीजा एक चिट्ठी!

सोमवार शाम से कमिश्नरेट में बैठे कांग्रेस नेताओं को बुधवार सुबह तक पुलिस कमिश्नर का इंतजार रहा। सुबह करीब 10:30 बजे सचिन मित्तल धरनास्थल पर पहुंचे और कमरा नंबर 9 में डोटासरा समेत अन्य नेताओं से बातचीत की। करीब एक घंटे की चर्चा के बाद पुलिस अधिकारियों ने कमिश्नर का जवाब कांग्रेस नेताओं तक पहुंचाया।

फिर दोपहर करीब 12:30 बजे डोटासरा को लिखित पत्र सौंपा गया। इसमें बताया गया कि जीरो FIR क्यों दर्ज नहीं की जा रही है। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने कमिश्नरेट से बाहर निकलने का फैसला किया।

सियासी सवाल यह है कि जब 42 घंटे तक मामला कमिश्नरेट के भीतर गर्म रहा, तो क्या अब यह पत्र विवाद को ठंडा कर पाएगा? या फिर यह चिट्ठी कांग्रेस के अगले सियासी कदम का आधार बनेगी?

डोटासरा जिंदाबाद के नारे लगे, तो खुद ही लगा दिया ब्रेक!

कमिश्नरेट से बाहर आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल में ‘गोविंद सिंह डोटासरा जिंदाबाद’ के नारे गूंजने लगे। लेकिन यहां कहानी ने दिलचस्प मोड़ लिया। डोटासरा ने अपने समर्थन में लग रहे नारे रुकवाए और कार्यकर्ताओं से कहा कि केवल ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ के नारे लगाएं।

अब इस एक दृश्य के कई सियासी मायने निकाले जा सकते हैं। क्या यह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति एकजुटता दिखाने का संदेश था? या फिर मौके पर स्थानीय नेतृत्व की जगह राहुल गांधी के नाम को आगे रखने की कोशिश? वजह जो भी रही हो, कैमरों के सामने यह पल धरने की बाकी तस्वीरों से अलग नजर आया।

पुलिस का ‘ना’, कांग्रेस का अगला दांव क्या?

रितु बराला मामले में कांग्रेस जीरो FIR दर्ज करने की मांग कर रही थी। पुलिस कमिश्नर ने लिखित जवाब देकर इसे स्वीकार नहीं किया। अब बहस सिर्फ धरने की अवधि पर नहीं, बल्कि पुलिस के तर्क और कांग्रेस की अगली रणनीति पर भी होगी।

जीरो FIR का मकसद क्षेत्राधिकार की वजह से शिकायत दर्ज होने में देरी रोकना है। लेकिन इस मामले में पुलिस ने किन विशिष्ट आधारों पर इनकार किया है, यह उसके पत्र की विस्तृत सामग्री से स्पष्ट होगा। कांग्रेस की ओर से उस जवाब पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी अहम रहेगा।

42 घंटे तक कमिश्नरेट में बैठना अपने आप में एक राजनीतिक संदेश था। लेकिन धरने का असली असर सिर्फ इस बात से तय नहीं होगा कि नेता कितनी देर बैठे, बल्कि इससे भी कि शिकायत के मुद्दे पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

फिलहाल तस्वीर कुछ ऐसी है—कांग्रेस मांग लेकर पहुंची, पुलिस ने लिखित जवाब दिया, मांग पूरी नहीं हुई और नेता बाहर आ गए। ऊपर से डोटासरा ने अपने ही जिंदाबाद के नारे रुकवाकर राहुल गांधी के नारे लगवाए।

यानी धरने में FIR का सवाल भी था और नारों की सियासत भी। अब देखना यह है कि कांग्रेस इस पत्र को संघर्ष का अगला अध्याय बनाती है या 42 घंटे का धरना राजनीतिक दबाव बनाने तक ही सीमित रह जाता है।