‘ऊपर से आदेश आया, नीचे नौटंकी शुरू हो गई’: रितु बराला केस में मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, बोले- हमारा त्योहार खराब कर रहे

रितु बराला मामले में कांग्रेस के धरने को मदन राठौड़ ने बताया नौटंकी। राहुल गांधी के फोन, डोटासरा के विरोध प्रदर्शन और जयपुर में जीरो एफआईआर की मांग पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने हैं। जानें पूरा विवाद और पुलिस का पक्ष।

‘ऊपर से आदेश आया, नीचे नौटंकी शुरू हो गई’: रितु बराला केस में मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, बोले- हमारा त्योहार खराब कर रहे

दिल्ली में हुई कथित मारपीट की एक घटना पर राजस्थान की राजनीति में ऐसा घमासान छिड़ा है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने पुलिस कमिश्नरेट में रात गुजार दी और अब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूरे धरने को ही ‘नौटंकी’ बता दिया है। राठौड़ ने कांग्रेस पर सुर्खियां बटोरने और त्योहार के दौरान राजस्थान में अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जहां घटना हुई है, कांग्रेस को वहीं जाकर प्रदर्शन करना चाहिए। मामला एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला से दिल्ली में हुई कथित मारपीट का है। कांग्रेस जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़ी है। दूसरी तरफ भाजपा इसे अनावश्यक राजनीतिक प्रदर्शन बता रही है। इस विवाद में राहुल गांधी का फोन, गोविंद सिंह डोटासरा का रातभर धरना और जयपुर पुलिस का एफआईआर दर्ज करने से इनकार अब तीन बड़े मुद्दे बन गए हैं।

‘ऊपर से निर्देश हुआ और नीचे वालों ने नाटक शुरू कर दिया’

प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मदन राठौड़ ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘ऊपर से निर्देश हुआ और नीचे वाले ने तुरंत, बिना विवेक का उपयोग किए नाटक शुरू कर दिया।’ राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए, न कि राजस्थान में अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश करनी चाहिए। राठौड़ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राहुल गांधी की ओर से गोविंद सिंह डोटासरा को फोन कर रितु बराला मामले में जयपुर में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहने की जानकारी सामने आई है।

‘जहां घटना हुई, वहीं प्रदर्शन करो; हमारा त्योहार क्यों खराब कर रहे?’

मदन राठौड़ ने कांग्रेस के धरने के समय और स्थान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में घटना हुई है, तो कांग्रेस नेताओं को वहीं जाकर प्रदर्शन करना चाहिए। राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजस्थान को परेशान करना चाहती है और त्योहार के दौरान विरोध प्रदर्शन करके माहौल खराब कर रही है। उन्होंने कहा, ‘यहां हमारा त्योहार खराब कर रहे हैं। यह ठीक बात नहीं है।’ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक प्रचार पाने की कोशिश बताया।

राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं की समझ पर उठाए सवाल

मदन राठौड़ ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं की कानूनी समझ पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं की बुद्धि पर आश्चर्य होता है। राठौड़ के अनुसार, अगर किसी मामले में थानाधिकारी या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी FIR दर्ज नहीं करते हैं, तो शिकायतकर्ता के पास न्यायालय जाने का विकल्प भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि इस्तगासे के जरिए अदालत से संबंधित थाने में मामला भेजने की मांग की जा सकती है। राठौड़ ने सवाल उठाया कि जब कानूनी विकल्प मौजूद हैं, तो कांग्रेस नेता राजस्थान में विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(1) के तहत संज्ञेय अपराध की सूचना घटना के स्थान से अलग किसी अन्य थाने में भी दी जा सकती है। इसलिए केवल घटना दिल्ली में होने से जयपुर में जीरो एफआईआर की कानूनी संभावना समाप्त नहीं होती। 

रितु बराला मामले में आखिर क्या है विवाद?

यह पूरा मामला 13 अक्टूबर को दिल्ली में हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियों ने उनके साथ मारपीट और अभद्रता की। रितु और कांग्रेस नेताओं की मांग है कि इस घटना को लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। इसी सिलसिले में सोमवार को जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की गई। लेकिन FIR दर्ज नहीं होने पर कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कमिश्नरेट में धरना शुरू कर दिया। कथित मारपीट के आरोपों की जांच और संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही का प्रश्न अभी कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।

राहुल गांधी के फोन के बाद डोटासरा पहुंचे कमिश्नरेट

इस पूरे घटनाक्रम में राहुल गांधी की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सामने आई जानकारी के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से फोन पर बातचीत कर रितु बराला मामले में जयपुर में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहा था। इसके बाद सोमवार शाम करीब 6:15 बजे डोटासरा जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे। उनके साथ कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। पुलिस से बातचीत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने पर कांग्रेस नेताओं ने कमिश्नरेट में ही धरना शुरू कर दिया। इसी घटनाक्रम को लेकर मदन राठौड़ ने ‘ऊपर से निर्देश’ आने और ‘नीचे नाटक’ शुरू होने वाली टिप्पणी की है।

रातभर जमीन पर सोए कांग्रेस नेता, सुबह धरनास्थल पर किया नाश्ता

रितु बराला मामले में जीरो एफआईआर की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सोमवार रात पुलिस कमिश्नरेट परिसर में बिताई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत कई नेता रात में जमीन पर सोए। मंगलवार सुबह भी धरना जारी रहा। नेताओं ने धरनास्थल पर ही चाय-नाश्ता किया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अपना जोधपुर दौरा रद्द कर विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया। कांग्रेस का कहना है कि जब तक रितु बराला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक वह पीछे नहीं हटेगी।

कमिश्नरेट के बाहर धक्का-मुक्की, पुलिस ने किया हल्का बल प्रयोग

मंगलवार को पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान नारेबाजी हुई और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। इस घटनाक्रम से पुलिस कमिश्नरेट के बाहर राजनीतिक तनाव बढ़ गया। हालांकि, इस विवरण में किसी प्रदर्शनकारी या पुलिसकर्मी के घायल होने की पुष्टि नहीं की गई है।

जयपुर पुलिस ने FIR दर्ज करने से क्यों किया इनकार?

इस मामले में जयपुर पुलिस ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है। एडिशनल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर अजय सिंह के अनुसार, 13 अक्टूबर को दिल्ली में हुए घटनाक्रम को लेकर कनॉट प्लेस थाने में पहले से केस दर्ज है। पुलिस का कहना है कि रितु बराला की शिकायत को भी उसी मामले में शामिल कर जांच की जा रही है। इसी आधार पर जयपुर पुलिस ने समान घटनाक्रम पर अलग एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया है। पुलिस के इस पक्ष के बाद विवाद का मुख्य सवाल यह बन गया है कि दिल्ली में दर्ज मामले में रितु बराला की शिकायत किस रूप में शामिल है और क्या उसी घटना के संबंध में पहले से विधिवत एफआईआर मौजूद है।

डोटासरा का पलटवार - दिल्ली की FIR दिखाए पुलिस

जयपुर पुलिस के जवाब से कांग्रेस संतुष्ट नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस से सवाल किया कि दिल्ली में आखिर कौन-सी FIR दर्ज है। उन्होंने मांग की कि पुलिस उस एफआईआर का विवरण सामने रखे। कांग्रेस का कहना है कि जब तक संबंधित रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं किया जाता और रितु बराला की शिकायत पर कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।

 

क्या कहता है जीरो FIR का कानून?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) के तहत संज्ञेय अपराध की सूचना किसी भी पुलिस थाने में दी जा सकती है, चाहे घटना उस थाने के क्षेत्राधिकार से बाहर हुई हो। इसी व्यवस्था को सामान्य तौर पर जीरो एफआईआर कहा जाता है। ऐसी एफआईआर को आगे की जांच के लिए संबंधित क्षेत्राधिकार वाली पुलिस को भेजा जा सकता है। हालांकि, यदि एक ही घटना और समान तथ्यों पर पहले से एफआईआर दर्ज है, तो दूसरी एफआईआर की वैधता का प्रश्न अलग से उठ सकता है। इसलिए रितु बराला मामले में निर्णायक बात यह है कि दिल्ली में पहले से दर्ज केस का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है।

कांग्रेस और भाजपा के बीच अब दोहरी लड़ाई

रितु बराला मामले में अब दो स्तरों पर विवाद चल रहा है। पहला कानूनी विवाद है। क्या जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, या दिल्ली में पहले से दर्ज मामले के तहत ही जांच आगे बढ़नी चाहिए? दूसरा राजनीतिक विवाद है। क्या कांग्रेस एक छात्र नेता की शिकायत पर कार्रवाई की मांग कर रही है, या भाजपा के आरोप के मुताबिक इस मुद्दे को सुर्खियों में रहने के लिए बड़ा आंदोलन बनाया जा रहा है? मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर त्योहार का माहौल खराब करने और अनावश्यक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया है। वहीं, डोटासरा और कांग्रेस के अन्य नेता एफआईआर दर्ज कराने की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दिल्ली में हुई कथित मारपीट से शुरू हुआ विवाद अब जयपुर में भाजपा-कांग्रेस के सीधे टकराव में बदल गया है। राहुल गांधी के फोन और डोटासरा के धरने ने इसे राजनीतिक रंग दिया है, लेकिन पूरे मामले का कानूनी समाधान दिल्ली में दर्ज केस के रिकॉर्ड और रितु बराला की शिकायत पर होने वाली कार्रवाई से ही तय होगा।