कोटा जाने का खर्च बचेगा, लेकिन क्या मोबाइल से सफलता मिलेगी? ऑनलाइन कोचिंग की बड़ी चुनौती
PM Modi की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग से छात्रों को कम खर्च में घर बैठे तैयारी का मौका मिलेगा। जानें ऑनलाइन कोचिंग के फायदे, चुनौतियां और मेंटरिंग की जरूरत।
आर्थिक राहत के साथ घर पर रहकर तैयारी का मौका कोटा में हाल ही में शुरू हुए एक ऑनलाइन कोचिंग संस्थान के निदेशक गजेंद्र अग्रवाल पिछले 26 वर्षों से बॉटनी पढ़ा रहे हैं और अब ऑनलाइन शिक्षा से भी जुड़े हैं। उनके मुताबिक ऑनलाइन कोचिंग के तीन बड़े फायदे हैं। कम खर्च, घर के सुरक्षित माहौल में पढ़ाई और माता-पिता की सीधी निगरानी। अग्रवाल का कहना है कि ऐसे विद्यार्थी जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा या किसी दूसरे बड़े शहर नहीं जा सकते, उनके लिए ऑनलाइन कोचिंग बड़ा विकल्प बनकर सामने आई है। ऑफलाइन कोचिंग के लिए दूसरे शहर जाने पर सिर्फ फीस ही खर्च नहीं होती। हॉस्टल या किराया, खाना, स्थानीय परिवहन और दूसरे दैनिक खर्च भी परिवार को उठाने पड़ते हैं। ऑनलाइन मॉडल में इनमें से ज्यादातर खर्च बच जाते हैं। विद्यार्थी को मुख्य रूप से इंटरनेट कनेक्शन और मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप जैसे डिवाइस की जरूरत होती है। वह अपने माता-पिता के साथ रहते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों के शिक्षकों से पढ़ सकता है। अग्रवाल के मुताबिक इसका सबसे ज्यादा फायदा उन विद्यार्थियों को मिल सकता है जो Self-Disciplined हैं और ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान दूसरी डिजिटल गतिविधियों से आसानी से विचलित नहीं होते। यानी जिस विद्यार्थी में खुद से नियमित पढ़ने की क्षमता है, उसके लिए ऑनलाइन कोचिंग कम खर्च में बेहतर तैयारी का रास्ता खोल सकती है। हालांकि ऑनलाइन मॉडल के फायदे जितने बड़े हैं, चुनौतियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
'कंटेंट फ्री करने से काम नहीं चलेगा, मेंटरिंग जरूरी'
शिक्षाविद् नीलेश गुप्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा को स्वागत योग्य कदम मानते हैं। उनका कहना है कि इससे खासतौर पर उन विद्यार्थियों को फायदा मिल सकता है जो महंगी ऑफलाइन कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते या ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहते हैं। लेकिन गुप्ता इस पूरी व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती की तरफ भी ध्यान दिलाते हैं। उनके मुताबिक इंटरनेट पर पहले से बड़ी मात्रा में मुफ्त शैक्षणिक सामग्री मौजूद है। इसलिए केवल विद्यार्थियों को कंटेंट उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती उस कंटेंट को विद्यार्थी की सफलता में बदलने की है। ऑनलाइन पढ़ाई में विद्यार्थी ने होमवर्क किया या नहीं, टेस्ट नियमित दिया या नहीं, उसका प्रदर्शन लगातार गिर क्यों रहा है और वह किस विषय में पिछड़ रहा है। इन सभी चीजों की व्यक्तिगत निगरानी ऑफलाइन क्लासरूम की तुलना में मुश्किल हो सकती है। विशेष रूप से JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई विद्यार्थी किशोरावस्था में होते हैं। ऐसे में उन्हें केवल शिक्षक के लेक्चर की नहीं बल्कि लगातार मार्गदर्शन और व्यक्तिगत फीडबैक की भी जरूरत पड़ सकती है। इसीलिए नीलेश गुप्ता का मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था में Homework Tracking, Test Monitoring, Personal Mentoring और Hand-Holding जैसे हिस्सों को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
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घर पर माता-पिता, लेकिन मोबाइल पर पूरा इंटरनेट
ऑनलाइन कोचिंग का एक दिलचस्प विरोधाभास भी यही है। एक तरफ विद्यार्थी माता-पिता की निगरानी में घर पर रहता है, लेकिन दूसरी तरफ उसकी पूरी पढ़ाई उसी डिवाइस पर होती है जिस पर सोशल मीडिया, गेमिंग, शॉर्ट वीडियो और दूसरी मनोरंजन सामग्री भी उपलब्ध है। इसलिए ऑनलाइन कोचिंग की सफलता काफी हद तक विद्यार्थी के आत्म-अनुशासन पर निर्भर करती है। एक फोकस्ड विद्यार्थी के लिए यही मोबाइल देश के अच्छे शिक्षक को उसके घर तक पहुंचा सकता है, जबकि अनुशासन की कमी होने पर यही डिवाइस पढ़ाई का सबसे बड़ा डिस्ट्रैक्शन भी बन सकता है। यही वजह है कि पीएम मोदी की प्रस्तावित मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था में सिर्फ Free Content उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। अगर सरकार इसे ऑफलाइन कोचिंग का वास्तविक विकल्प बनाना चाहती है तो डिजिटल लेक्चर के साथ मेंटोरिंग, टेस्टिंग, डाउट सॉल्विंग, प्रोग्रेस ट्रैकिंग और पैरेंट्स के लिए फीडबैक सिस्टम भी तैयार करना होगा। तभी मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का फायदा केवल लाखों विद्यार्थियों तक पहुंचने में नहीं, बल्कि उनकी सफलता में भी दिखाई देगा। क्योंकि ऑनलाइन शिक्षा की असली लड़ाई अब 'कंटेंट तक पहुंच' की नहीं, 'कंटेंट से रिजल्ट' तक पहुंचने की है।


