पोद्दार स्कूल से विधानसभा तक कांग्रेस का मार्च, जूली बोले - कमियां सुधारने के बजाय उन्हें दिखाने पर रोक
जयपुर में सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं और मीडिया कवरेज को लेकर जारी नए नियमों का विवाद अब विधानसभा की राजनीति तक पहुंच गया है।
जयपुर के मूक-बधिर पोद्दार स्कूल की व्यवस्थाओं और सरकारी स्कूलों में मीडिया कवरेज को लेकर जारी नए निर्देशों के विरोध में कांग्रेस सड़क पर उतर आई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक और नेता पोद्दार स्कूल पहुंचे। कांग्रेस ने स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। जयपुर में सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं और मीडिया कवरेज को लेकर जारी नए नियमों का विवाद अब विधानसभा की राजनीति तक पहुंच गया है।
मूक-बधिर पोद्दार स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस गुरुवार को विरोध में उतर आई।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक और नेता सुबह त्रिमूर्ति सर्किल स्थित पोद्दार स्कूल पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल ने स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च के जरिए सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की तैयारी की। कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए दो मुद्दों को एक साथ उठा रही है। सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं और स्कूल परिसरों में मीडिया कवरेज को लेकर लागू किए गए नए नियम।
जूली बोले- 15 दिन पहले आए थे, सुधार का मिला था आश्वासन
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पोद्दार स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग पर सवाल उठाए। जूली ने कहा, “हम यहां 15 दिन पहले आए थे। यहां स्थिति बदहाल थी। हमें कहा गया था कि 15 दिन में स्थिति सुधार लेंगे। लेकिन आज आए हैं तो यहां हमें एक बोर्ड और एक नियम मिला है, जिसके तहत हम स्कूल के अंदर नहीं जा सकते। मीडिया यहां कवरेज नहीं कर सकती और अंदर जाकर कमियां नहीं दिखा सकते।” कांग्रेस का आरोप है कि स्कूल की समस्याओं को दूर करने के बजाय सरकार ने ऐसे नियम लागू कर दिए हैं जिनसे स्कूलों के अंदर की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाना मुश्किल होगा।
स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च
पोददार स्कूल पहुंचने के बाद कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा तक पैदल मार्च के जरिए विरोध दर्ज कराने का फैसला किया। इस मार्च के जरिए कांग्रेस सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं के साथ मीडिया और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश तथा फोटो-वीडियोग्राफी से संबंधित शिक्षा विभाग के निर्देशों को भी राजनीतिक मुद्दा बना रही है। कांग्रेस की रणनीति इस मामले को सिर्फ एक स्कूल तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिखाई दे रही है।
मीडिया कवरेज के नियम पर क्यों बढ़ा विवाद?
शिक्षा विभाग की ओर से हाल में सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। इनके तहत स्कूल परिसर में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए संस्था प्रधान की अनुमति जरूरी है, जबकि विद्यार्थियों और स्कूल गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग के लिए पूर्व लिखित अनुमति का प्रावधान किया गया है। विभाग ने विद्यार्थियों की सुरक्षा, निजता और गरिमा को इन नियमों का प्रमुख आधार बताया है। वहीं विपक्ष का सवाल है कि अगर स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली या बुनियादी सुविधाओं की ही शिकायत हो तो स्वतंत्र मीडिया कवरेज और वास्तविक स्थिति की पड़ताल कैसे होगी?
पोद्दार स्कूल बना सरकार बनाम विपक्ष की नई लड़ाई का केंद्र
पोददार स्कूल का मामला अब इसी बड़े विवाद का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस का दावा है कि उसके नेता करीब 15 दिन पहले भी स्कूल पहुंचे थे और उस समय व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया गया था। अब दोबारा पहुंचने पर प्रवेश से संबंधित नियम और बोर्ड सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे सरकार की पारदर्शिता से जोड़ दिया है। हालांकि शिक्षा विभाग के नए नियमों का घोषित उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करना है। ऐसे में असली विवाद अब इस बात को लेकर है कि बच्चों की निजता की रक्षा और सरकारी संस्थानों की सार्वजनिक जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
विधानसभा में भी गरमा सकता है मुद्दा
कांग्रेस विधायक दल का पोद्दार स्कूल से विधानसभा तक मार्च इस बात का संकेत है कि मामला अब सड़क तक सीमित नहीं रहने वाला। विपक्ष विधानसभा में भी शिक्षा विभाग और सरकार से सरकारी स्कूलों की स्थिति तथा मीडिया कवरेज संबंधी नियमों पर जवाब मांग सकता है। इस पूरे विवाद ने सरकार के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर किसी सरकारी स्कूल में अव्यवस्था की शिकायत है तो उसकी स्वतंत्र पड़ताल का रास्ता क्या होगा? दूसरी तरफ सरकार के सामने बच्चों की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। यही वजह है कि पोद्दार स्कूल से शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ एक स्कूल की व्यवस्थाओं की कहानी नहीं रहा। यह सरकारी स्कूलों में 'Privacy बनाम Transparency' की नई राजनीतिक लड़ाई बनता जा रहा है।

