राजस्थान में 27 अफसरों पर चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा, CM भजनलाल शर्मा ने 21 मामलों में दी मंजूरी; 2 SDM और एक DSP भी शामिल

राजस्थान में भ्रष्टाचार के 21 मामलों में 27 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी गई है। इनमें दो SDM, एक DSP और कृषि, PWD समेत कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं।

राजस्थान में 27 अफसरों पर चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा, CM भजनलाल शर्मा ने 21 मामलों में दी मंजूरी; 2 SDM और एक DSP भी शामिल
Cm Bhajanlal Sharma

राजस्थान में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में 27 अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से संबंधित कुल 21 मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। अभियोजन स्वीकृति पाने वाले मामलों में दो उपखंड अधिकारी (SDM) और एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) से जुड़े प्रकरण भी शामिल हैं। इसके अलावा कृषि, सार्वजनिक निर्माण, वाणिज्यिक कर और अन्य विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है। हालांकि, सभी 27 अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

दो SDM पर जमीन से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के आरोप

अभियोजन स्वीकृति वाले मामलों में दो उपखंड अधिकारियों से संबंधित प्रकरण भी शामिल हैं। एक एसडीएम पर कृषि भूमि का नियमों के विपरीत गैर-कृषि उपयोग के लिए भू-रूपांतरण (लैंड कन्वर्जन) करने का आरोप है। मामले में आरोप है कि संबंधित भूमि का कन्वर्जन निर्धारित नियमों का पालन किए बिना किया गया। वहीं, दूसरे एसडीएम पर पद का दुरुपयोग कर जमीन से जुड़े मामले में अनुचित निर्णय देने का आरोप है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण में जमीन से संबंधित खातेदारी अधिकार का दावा गलत तरीके से डिक्री करवाने का आरोप लगाया गया है। दोनों मामलों में अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

DSP पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप

मुख्यमंत्री ने एक पुलिस उपाधीक्षक के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है। संबंधित डीएसपी पर भ्रष्ट गतिविधियों के जरिए कथित रूप से अवैध धन अर्जित करने और अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण दर्ज किया था। अब अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। हालांकि, संपत्ति की वास्तविक कीमत और आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत साक्ष्यों तथा अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।

कृषि विभाग के पांच अधिकारियों के खिलाफ मंजूरी

अभियोजन स्वीकृति से संबंधित जानकारी के अनुसार, कृषि विभाग के पांच अधिकारी इन मामलों में शामिल हैं। इसके अलावा सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के तीन और वाणिज्यिक कर विभाग के दो अधिकारियों से संबंधित मामलों में भी मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है। स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, देवस्थान, इंदिरा गांधी नहर परियोजना और सहकारिता विभाग से जुड़े अधिकारियों के मामलों में भी अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। इन विभागों से संबंधित मामलों के विस्तृत आरोप और संबंधित अधिकारियों की पहचान की पूरी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं कराई गई है।

एक BDO और राजस्थान लेखा सेवा के अधिकारी पर भी केस

अभियोजन स्वीकृति वाले मामलों में एक विकास अधिकारी (BDO) और राजस्थान लेखा सेवा के एक अधिकारी से संबंधित प्रकरण भी शामिल हैं। इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले एसीबी में दर्ज होने की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इन प्रकरणों में भी आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

अभियोजन स्वीकृति का क्या मतलब है?

भ्रष्टाचार से जुड़े कुछ मामलों में लोक सेवकों के खिलाफ अदालत में अभियोजन चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है। अभियोजन स्वीकृति मिलने का अर्थ है कि संबंधित मामले में कानून के अनुसार अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, अभियोजन स्वीकृति मिलने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित अधिकारी दोषी साबित हो गया है। आरोपों की जांच, साक्ष्यों और न्यायिक सुनवाई के आधार पर अदालत अंतिम निर्णय करती है।

21 मामलों में 27 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ेगी

राजस्थान सरकार की ओर से 21 भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में 27 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दिए जाने के बाद एसीबी संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई कर सकेगी। इनमें भूमि से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले, पद के दुरुपयोग के आरोप और आय से अधिक संपत्ति से संबंधित प्रकरण शामिल हैं। फिलहाल सभी अधिकारियों के नाम और प्रत्येक मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आगामी कानूनी प्रक्रिया में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में किस हद तक प्रमाणित होते हैं।