फारूक अब्दुल्ला का बयान—‘दिल्ली से इंसाफ की उम्मीद नहीं’, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को लेकर कही बड़ी बात

बारामुल्ला में फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली से न्याय की उम्मीद पर सवाल उठाते हुए पड़ोसी देश का भी जिक्र किया।

फारूक अब्दुल्ला का बयान—‘दिल्ली से इंसाफ की उम्मीद नहीं’, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को लेकर कही बड़ी बात

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और राज्य के अधिकारों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। बारामुल्ला में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने दिल्ली से न्याय मिलने की उम्मीद पर सवाल उठाया और लोगों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

फारूक अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि कश्मीर के मुद्दे को लेकर पड़ोसी देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखता रहा है। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

‘दिल्ली से क्या उम्मीद करेंगे?’

फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की बात आती है तो दिल्ली से क्या उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने लोगों से हिम्मत के साथ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने को कहा।

उन्होंने कहा कि अगर लोग अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का साहस नहीं दिखाएंगे तो उनकी पहचान और राजनीतिक आवाज कमजोर हो सकती है। बारामुल्ला में दिए उनके भाषण में लोगों से एकजुट रहने और चुनौतियों का सामना करने की अपील भी की गई।

पाकिस्तान का नाम लेकर क्या बोले फारूक?

फारूक अब्दुल्ला ने अपने बयान में पड़ोसी देश का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीर के मुद्दे को लेकर वह कई जगहों पर अपनी बात रखता है। उनके बयान में पाकिस्तान की ओर संकेत किया गया।

उन्होंने दावा किया कि कश्मीर के मुद्दे पर पड़ोसी देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता के कारण इस मुद्दे पर चर्चा बनी हुई है। इस बयान के बाद भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

हालांकि, फारूक अब्दुल्ला के बयान को उनकी राजनीतिक राय और आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए। इन दावों से जुड़े निष्कर्षों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

अनुच्छेद 370 पर जारी है फारूक अब्दुल्ला की मांग

फारूक अब्दुल्ला लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे से जुड़े प्रावधानों की बहाली की मांग करते रहे हैं। हाल ही में भी उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया था और अपनी पार्टी की ओर से अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली की मांग दोहराई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार के 2019 के फैसले को बरकरार रखा था। इसके बाद भी नेशनल कॉन्फ्रेंस इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक मांग जारी रखे हुए है।

राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी उठाई

बारामुल्ला में फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।

उन्होंने लोगों से धार्मिक और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक आवाज उठाना जरूरी है।

फारूक अब्दुल्ला के ताजा बयान के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अनुच्छेद 370, राज्य का दर्जा और केंद्र के साथ संबंधों को लेकर बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।