हमारा गांव विकास से अछूता, बारिश में करवानी पड़ती बच्चों की छुट्टी, छलका गोगियावास के ग्रामीणों का दर्द

कुम्हारिया बॉस ग्राम पंचायत के गोगियावास में ग्रामीणों ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्ट्रीट लाइट और जल निकासी जैसी समस्याएं उठाईं। ग्रामीणों ने चुनावी वादों के बजाय धरातल पर विकास की मांग की।

हमारा गांव विकास से अछूता, बारिश में करवानी पड़ती बच्चों की छुट्टी, छलका गोगियावास के ग्रामीणों का दर्द

पंचायती राज चुनाव की तैयारियों के बीच कुम्हारिया बॉस ग्राम पंचायत में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सरपंच पद के संभावित प्रत्याशी गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और विकास के वादे कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों के मन में सवाल है कि चुनाव जीतने के बाद उनके गांव की समस्याओं का समाधान कब होगा? 

इन्हीं सवालों को लेकर PK Times की टीम कुम्हारिया बॉस ग्राम पंचायत के गोगियावास गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर अपनी परेशानियां साझा कीं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चुनाव होते रहे, लेकिन उनके गांव में आज भी कई जरूरी सुविधाओं का अभाव है।

‘गांव में सड़क, स्ट्रीट लाइट और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं नहीं’

बातचीत के दौरान एक ग्रामीण ने कहा कि गांव को एक परिवार की तरह देखा जाना चाहिए और सरपंच उस परिवार का मुखिया होता है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने सरपंच से वही उम्मीद करते हैं, जो परिवार के मुखिया से की जाती है। वह सभी लोगों की समस्याएं समझे और पूरे गांव के विकास के लिए काम करे।’ ग्रामीण ने आरोप लगाया कि गांव में सड़क, स्ट्रीट लाइट, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना था कि सरकार की कई योजनाएं संचालित होने के बावजूद गांव में उनका अपेक्षित लाभ दिखाई नहीं देता।

‘बारिश में तीन दिन तक स्कूल नहीं जा पाते बच्चे’ 

गोगियावास के ग्रामीणों ने सबसे गंभीर समस्याओं में खराब सड़क और स्कूल तक पहुंचने की परेशानी को बताया। एक युवक ने कहा कि उनके गांव से स्कूल करीब चार किलोमीटर दूर है। बारिश के दौरान रास्ते में पानी भर जाने से बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण ने बताया, ‘बारिश होती है तो हमारे गांव के बच्चों को कई बार दो-तीन दिन तक स्कूल नहीं जाने के लिए कहा जाता है। जब तक रास्ते का पानी नहीं सूखता, बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते।’ ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

‘विधायक भी नहीं सुनते हमारी बात’  

गोगियावास के एक युवक ने गांव की सड़क की समस्या को लेकर नाराजगी जताई। उसने बताया कि करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे रास्ते के निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। युवक के अनुसार, गांव चाकसू विधानसभा क्षेत्र की सीमा पर स्थित है और आसपास अन्य विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं भी हैं। उसने आरोप लगाया, ‘हम चाकसू के विधायक के पास गए तो कहा गया कि यह सड़क उनके क्षेत्र में नहीं आती। सांगानेर में बात की तो वहां से भी ऐसा ही जवाब मिला। आखिर हम अपनी समस्या लेकर कहां जाएं?’ युवक ने कहा कि उसकी उम्र करीब 27-28 साल हो चुकी है, लेकिन उसने अपने जीवनकाल में इस सड़क का निर्माण होते नहीं देखा। ग्रामीणों ने मांग की कि संबंधित विभाग सड़क की स्थिति और उसके प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करे तथा निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

‘वोट कम हैं, लेकिन हम भी इसी विधानसभा के नागरिक’

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव की आबादी और मतदाताओं की संख्या कम होने के कारण उनकी समस्याओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलती। एक युवक ने कहा, ‘हमारा गांव विधानसभा क्षेत्र के आखिरी हिस्से में है। यहां वोट कम हैं, लेकिन हम भी इसी विधानसभा के नागरिक हैं। हमें भी विकास का उतना ही अधिकार है।’ ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, जल निकासी और अन्य सुविधाओं के लिए उन्हें बार-बार अलग-अलग जनप्रतिनिधियों और विभागों के पास जाना पड़ता है।

युवाओं ने मांगा खेल मैदान, स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी कैमरे 

गांव के युवाओं ने शिक्षा के साथ खेल सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि गांव में बच्चों और युवाओं के खेलने के लिए व्यवस्थित मैदान नहीं है। ग्रामीणों ने प्रमुख चौराहों पर स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और जल निकासी के लिए नालियां बनवाने की मांग की। एक युवक ने आरोप लगाया कि कुछ विकास कार्यों की चर्चा तो होती है, लेकिन जमीन पर उनका लाभ दिखाई नहीं देता। उसने कहा कि नए सरपंच से उम्मीद है कि वह केवल घोषणाएं करने के बजाय गांव की जरूरतों के अनुसार काम करवाएंगे।

‘सरकारी रोजगार योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा’

रोजगार को लेकर सवाल पूछे जाने पर ग्रामीणों ने मनरेगा जैसी सरकारी रोजगार योजनाओं का मुद्दा उठाया। एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले रोजगार का लाभ गांव के सभी जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच रहा। उसने कहा, ‘सरकार रोजगार की योजना चलाती है, लेकिन उसका फायदा हम तक नहीं पहुंच पाता।’ ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और सभी पात्र परिवारों को समान अवसर देने की मांग की। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कार्यकालों में विकास कार्यों को लेकर पक्षपात की शिकायतें रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पूर्व जनप्रतिनिधियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है।

बुजुर्ग बोले- ‘कई सरपंच आए, लेकिन गांव की समस्याएं बनी रहीं’

गांव के बुजुर्गों ने भी विकास कार्यों को लेकर असंतोष जताया। एक बुजुर्ग ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई पंचायत चुनाव देखे हैं, लेकिन गांव की कई समस्याएं आज भी जस की तस हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण की मांग उठाने पर कई बार आश्वासन मिले, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के स्कूल को लेकर भी पहले समस्याएं सामने आई थीं। स्थानीय लोगों के प्रयासों से स्कूल की व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली। बुजुर्गों का कहना है कि अब पंचायत को शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

हनुमान गुर्जर से ग्रामीणों ने जताई उम्मीद 

बातचीत के दौरान कई ग्रामीणों ने गोगियावास से सरपंच पद के संभावित प्रत्याशी हनुमान गुर्जर का समर्थन करने की बात कही। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव से पहले भी सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा गया था, लेकिन प्रत्याशी कुछ वोटों से हार गए थे। एक ग्रामीण ने कहा, ‘हमने पहले दूसरे गांवों के प्रत्याशियों का साथ दिया है। इस बार चाहते हैं कि हमारे गांव के प्रत्याशी को भी मौका मिले।’ कुछ ग्रामीणों ने हनुमान गुर्जर के प्रशासनिक अनुभव और स्थानीय गतिविधियों से जुड़े होने का उल्लेख किया। हालांकि, यह ग्रामीणों की व्यक्तिगत राय है। पंचायत के सभी मतदाताओं की राय या चुनाव परिणाम का इससे अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

‘सिर्फ चुनावी वादे नहीं, धरातल पर विकास चाहिए’ 

PK Times से बातचीत में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता गांव में बुनियादी सुविधाओं का विकास है। वे चाहते हैं कि नई पंचायत सड़क निर्माण, स्कूल तक सुरक्षित रास्ता, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, खेल मैदान, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार योजनाओं पर ध्यान दे। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच किसी भी गांव से चुना जाए, उसे पूरी ग्राम पंचायत के लोगों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। गोगियावास के ग्रामीणों की मांग है कि चुनाव के समय किए जाने वाले विकास के वादे जीत के बाद धरातल पर भी दिखाई दें। आगामी पंचायत चुनाव में मतदाता किसे जिम्मेदारी सौंपेंगे, यह मतदान और मतगणना के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल ग्रामीण अपनी समस्याओं को प्रत्याशियों के सामने रख रहे हैं और उनसे समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।