CJP की बढ़ती सक्रियता से BJP की टेंशन? आने वाले चुनाव में बन सकती है चुनौती
राजस्थान में CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अलवर और जयपुर से आगे बढ़ रहा है। सरकारी स्कूलों की बदहाली के मुद्दे के जरिए पार्टी राजनीतिक-सामाजिक आधार मजबूत करने की कोशिश में है।
राजस्थान में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सक्रियता अब सिर्फ सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठाने तक सीमित होती नजर नहीं आ रही है। अलवर और जयपुर जैसे जिलों में पार्टी के नेताओं के लगातार जमीनी दौरों और ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान ने इसे एक बड़े राजनीतिक-सामाजिक अभियान का रूप देना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि CJP ऐसे मुद्दों को उठा रही है, जिनका सीधा संबंध ग्रामीण परिवारों, बच्चों और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से है।
सरकारी स्कूलों की बदहाली को बना रही राजनीतिक मुद्दा
CJP की ओर से राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पानी, बिजली, शौचालय, जर्जर भवन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्टी के नेता अलवर के जोधवास और जयपुर के बगरू, रामपुरा-कंवरपुरा सहित ग्रामीण इलाकों में स्कूलों का निरीक्षण कर जमीनी हालात सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।
CJP का दावा है कि सरकारी दावों और ग्रामीण स्कूलों की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर है। यही अंतर पार्टी अपने राजनीतिक अभियान का आधार बनाने की कोशिश कर रही है।
स्कूलों के दौरे से बढ़ा प्रशासन से टकराव
CJP की बढ़ती सक्रियता के बीच शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियोग्राफी को लेकर निर्देश जारी किए जाने का मुद्दा भी सामने आया है। इसके बाद राजनीतिक टकराव और तेज हुआ है।
जयपुर के बगरू में CJP नेता आशुतोष रांका और उनके समर्थकों के स्कूल दौरे के दौरान स्थानीय स्तर पर विरोध और झड़प की घटना ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया। घटना के बाद CJP ने इसे अपने अभियान को रोकने की कोशिश बताया, जबकि स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
अलवर से जयपुर तक ग्राउंड कनेक्ट बनाने की कोशिश
CJP के लिए राजस्थान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल आशुतोष रांका का राजस्थान से संबंध है। ऐसे में अलवर और जयपुर जैसे इलाकों में जमीनी सक्रियता को पार्टी के संभावित विस्तार की शुरुआती रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी अगर सरकारी स्कूल, शिक्षा, बेरोजगारी और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को लगातार उठाती है तो वह सीधे उस वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकती है, जो स्थानीय स्तर पर सरकार और प्रशासन के कामकाज से प्रभावित होता है।
आने वाले निकाय और पंचायत चुनाव में बीजेपी के लिए चुनौती?
राजस्थान में आने वाले निकाय और पंचायत चुनावों के लिहाज से CJP की सक्रियता को बीजेपी के लिए संभावित चुनौती के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि CJP चुनावी तौर पर कितनी मजबूत होगी, लेकिन स्थानीय मुद्दों पर लगातार आंदोलन खड़ा करने से पार्टी को कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक पहचान जरूर मिल सकती है।
बीजेपी के लिए चुनौती सिर्फ वोटों के बंटवारे की नहीं होगी, बल्कि यह भी होगी कि विपक्षी दलों और नए राजनीतिक संगठनों को स्थानीय स्तर पर सरकार के खिलाफ मुद्दा खड़ा करने का कितना मौका मिलता है। अगर CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अलवर और जयपुर से निकलकर दूसरे जिलों तक पहुंचता है, तो आने वाले पंचायत और निकाय चुनावों में यह एक नया राजनीतिक नैरेटिव तैयार कर सकता है।
CJP का असली लक्ष्य क्या?
फिलहाल CJP की गतिविधियों को दो स्तरों पर देखा जा सकता है—पहला, सरकारी स्कूलों की बुनियादी समस्याओं को सामने लाकर प्रशासन पर दबाव बनाना और दूसरा, इसी अभियान के जरिए जमीनी राजनीतिक नेटवर्क तैयार करना।
राजस्थान जैसे बड़े राज्य में किसी नए राजनीतिक संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करना है। CJP अगर स्कूल और शिक्षा जैसे सीधे जनसरोकार वाले मुद्दों को लगातार उठाती है, तो उसे गांव और कस्बों में अपनी राजनीतिक जमीन बनाने का मौका मिल सकता है।
इसलिए आने वाले दिनों में नजर सिर्फ CJP के बयानों पर नहीं, बल्कि इस बात पर होगी कि पार्टी राजस्थान में कितने जिलों तक अपना ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान पहुंचा पाती है और क्या यह अभियान निकाय-पंचायत चुनावों तक एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल पाता है।

