सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भड़के CJI, वकील से बोले- क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है?

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI नाराज हो गए। जानिए व्यापारियों के नुकसान, निजता और फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी पर अदालत में क्या दलीलें दी गईं।

सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भड़के CJI, वकील से बोले- क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है?

दिल्ली में जुलाई और अक्टूबर के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकार, व्यापारियों को हो रहे नुकसान और प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से तस्वीरें व वीडियो रिकॉर्ड किए जाने जैसे मुद्दे उठे। सुनवाई के दौरान लगातार बीच में बोल रहे एक वकील पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई और कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है?”

प्रदर्शन से व्यापारियों को हो रहा नुकसान: मुकुल रोहतगी

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने व्यापार संगठनों की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। रामलीला मैदान के आसपास थोक बाजार हैं, जहां लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। उन्होंने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि विरोध प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान को प्रदर्शन स्थल बनाने पर वहां आसपास व्यापारिक गतिविधियां होना स्वाभाविक है। केवल व्यापार प्रभावित होने के आधार पर प्रदर्शन के अधिकार को रोका नहीं जा सकता।

जुलाई में एक दिन की अनुमति लेकर 17 दिन तक चला प्रदर्शन

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सभी पहलुओं पर अलग-अलग जवाब तैयार किया गया है और उसे दाखिल किया जा रहा है। उन्होंने जुलाई में हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शन के लिए एक दिन की अनुमति ली गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी 17 दिनों तक वहां बैठे रहे। इसके बाद संसद मार्च का आह्वान भी किया गया।

प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने पर भी बहस

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के समय पुलिस की ओर से लोगों की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर भी नोटिस जारी करने की मांग की। उनका तर्क था कि इस तरह लोगों की निजता का उल्लंघन होता है।

इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करने वाले लोग निजता का हवाला दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तर्क के आधार पर तो सीसीटीवी कैमरे बंद करने की मांग भी की जा सकती है।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यहां मुख्य सवाल फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर है। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी बताया कि सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि केवल कैप्चर की गई तस्वीरों के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान करके उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर पहले ही नोटिस जारी हो चुका है।

बार-बार टोकने पर CJI ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के एक वकील के बार-बार बीच में बोलने पर चीफ जस्टिस ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने वकील को फटकार लगाते हुए कहा, “क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है? इस तरह का आचरण नहीं चल सकता।”

CJI ने याचिकाकर्ताओं को यह भी सलाह दी कि एक जैसे मुद्दों पर मिलती-जुलती याचिकाएं बार-बार दाखिल न करें। अदालत के मुताबिक, इससे सुनवाई की प्रक्रिया में कठिनाई होती है। सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।