जमीन से 200 किलोमीटर नीचे अरबों साल में बनता है हीरा, लैब में कुछ हफ्तों में कैसे तैयार हो जाता है? जानिए पूरी कहानी

पेंसिल की नोक में मौजूद ग्रेफाइट और करोड़ों का हीरा एक ही तत्व कार्बन से बने हैं। जानिए परमाणुओं की संरचना, प्राकृतिक हीरे के निर्माण और लैब में हीरा बनाने की तकनीक का पूरा विज्ञान।

जमीन से 200 किलोमीटर नीचे अरबों साल में बनता है हीरा, लैब में कुछ हफ्तों में कैसे तैयार हो जाता है? जानिए पूरी कहानी

 एक तरफ पांच रुपए की पेंसिल है और दूसरी तरफ करोड़ों रुपए का चमचमाता हीरा। दोनों में एक ऐसी समानता है, जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह सकते हैं। पेंसिल की नोक में मौजूद ग्रेफाइट और दुनिया के सबसे कीमती रत्नों में शामिल हीरा, दोनों मुख्य रूप से एक ही रासायनिक तत्व से बने होते हैं - कार्बन। 

लेकिन ग्रेफाइट इतनी मुलायम होती है कि कागज पर लिखते समय उसकी परतें उतरने लगती हैं। दूसरी तरफ हीरा प्राकृतिक रूप से मिलने वाले सबसे कठोर पदार्थों में से एक है। आखिर एक ही तत्व से बने दो पदार्थों में इतना बड़ा अंतर कैसे आ जाता है? इसका जवाब छिपा है पृथ्वी के भीतर मौजूद अत्यधिक दबाव, हजारों डिग्री तापमान और कार्बन के परमाणुओं की संरचना में। 

प्राकृतिक हीरे पृथ्वी के भीतर लगभग 140 से 200 किलोमीटर या उससे अधिक गहराई में बन सकते हैं। कई हीरे अरबों साल पुराने होते हैं। लेकिन आज वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर चुके हैं, जिनसे प्रयोगशाला में कुछ हफ्तों के भीतर हीरा तैयार किया जा सकता है। PK Times की इस विशेष मेगा स्टोरी में समझिए हीरे के बनने से लेकर उसकी कीमत और लैब में तैयार होने तक की पूरी कहानी।