‘विकास कोई बच्चा नहीं, जो हर कोई पैदा कर देगा’, सरपंच चुनाव से पहले कुम्हारिया बॉस के ग्रामीणों ने गिनाईं समस्याएं

कुम्हारिया बॉस पंचायत में सरपंच चुनाव की चर्चा के बीच ग्रामीणों ने सड़क, सरकारी स्कूल, नाली, स्ट्रीट लाइट और रोजगार की समस्याएं उठाईं। कुछ ग्रामीणों ने दिनेश चौधरी के समर्थन में अपनी राय रखी।

‘विकास कोई बच्चा नहीं, जो हर कोई पैदा कर देगा’, सरपंच चुनाव से पहले कुम्हारिया बॉस के ग्रामीणों ने गिनाईं समस्याएं

गांव में सरपंच चुनाव की चर्चा शुरू होते ही उम्मीदवारों के नाम सामने आने लगते हैं, समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो जाती हैं और विकास के वादे किए जाने लगते हैं। लेकिन इस बार कुम्हारिया बॉस पंचायत के कुछ ग्रामीणों की बातों में सिर्फ चुनावी उत्साह नहीं, बल्कि पिछले वर्षों में अधूरे रह गए विकास कार्यों को लेकर नाराजगी भी दिखाई दी। गांव की सड़कों की खराब स्थिति, सरकारी स्कूल की बदहाली, नालियों की समस्या, स्ट्रीट लाइट और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दे ग्रामीणों ने प्रमुखता से उठाए। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान एक युवक ने विकास को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने पूरी चर्चा का ध्यान खींच लिया।

उसने कहा, ‘विकास कोई बच्चा नहीं है, जिसको हर कोई पैदा कर देगा। विकास करने से होगा। विकास के लिए लड़ना पड़ेगा और जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरना पड़ेगा।’ इस बातचीत में शामिल कई ग्रामीणों ने सरपंच पद के संभावित उम्मीदवार दिनेश चौधरी का समर्थन किया और उनसे पंचायत के विकास की उम्मीदें जताईं। हालांकि, ये विचार बातचीत में शामिल ग्रामीणों के हैं। इन्हें पूरी ग्राम पंचायत या सभी मतदाताओं की सामूहिक राय नहीं माना जा सकता।

‘हमारा गांव पंचायत में सबसे पिछड़ा हुआ’

ग्रामीणों से बातचीत के दौरान एक युवक ने दावा किया कि उसकी ग्राम पंचायत में उसका गांव विकास के मामले में सबसे पीछे रह गया है। उसने कहा कि पिछले चुनावों में ग्रामीणों ने अलग-अलग उम्मीदवारों का समर्थन किया, लेकिन अपेक्षित विकास कार्य नहीं हुए। ग्रामीण के अनुसार, गांव की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं और अब लोग ऐसे प्रतिनिधि की तलाश में हैं, जो केवल सरपंच की कुर्सी हासिल करने के बजाय समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहे। उसने कहा कि विकास सिर्फ वादों से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए लगातार प्रयास करने होंगे।

सड़क बनी सबसे बड़ा मुद्दा, ग्रामीण बोले -रास्ते की हालत नदी जैसी

ग्राम पंचायत में विकास को लेकर बातचीत के दौरान सड़क की खराब स्थिति बार-बार सामने आई। एक ग्रामीण ने कहा कि गांव तक पहुंचने वाले रास्ते की हालत इतनी खराब है कि वह नदी जैसा दिखाई देता है। उसने पत्रकार से कहा कि गांव में आते समय रास्ते की स्थिति देखकर ही यहां की समस्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। अन्य ग्रामीणों ने भी आवागमन की सड़क को प्रमुख समस्या बताया। उनका कहना था कि खराब रास्तों के कारण रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि आने वाली पंचायत में सड़क निर्माण और मरम्मत को प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकारी स्कूल की बदहाली पर भी उठे सवाल

सड़क के बाद ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया कि गांव में सरकारी स्कूल तो है, लेकिन उसकी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने स्कूल की चारदीवारी और भवन से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव का विकास केवल सड़क और नाली बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। सरकारी स्कूलों में सुरक्षित परिसर, बेहतर सुविधाएं और बच्चों की पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण भी जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नया पंचायत नेतृत्व शिक्षा से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देगा।

‘सरपंच की गद्दी नहीं, जनता की सेवा करने वाला प्रतिनिधि चाहिए’

बातचीत में शामिल एक ग्रामीण ने सरपंच पद के संभावित उम्मीदवार दिनेश चौधरी के समर्थन में अपनी राय रखी। उसने कहा कि दिनेश चौधरी में उसे पारंपरिक राजनीति से अलग सोच दिखाई देती है। ग्रामीण के अनुसार, वह ऐसे प्रतिनिधि का समर्थन करना चाहता है जो केवल पद हासिल करने के बजाय लोगों के बीच रहकर काम करे। उसने दावा किया कि दिनेश चौधरी पिछले दो से तीन वर्षों से ग्रामीणों के संपर्क में हैं और पंचायत की समस्याओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीण ने यह भी कहा कि दिनेश चौधरी की योजनाओं और बातचीत के तरीके से उसे उम्मीद है कि पंचायत में बदलाव हो सकता है। हालांकि, दिनेश चौधरी की ओर से कोई विस्तृत लिखित विकास योजना इस बातचीत में प्रस्तुत नहीं की गई।

दिनेश चौधरी के समर्थन में बोले पूर्व उपसरपंच

ग्रामीणों से बातचीत के दौरान एक बुजुर्ग ने स्वयं को पूर्व उपसरपंच बताते हुए युवा नेतृत्व का समर्थन किया। उन्होंने दिनेश चौधरी को पढ़ा-लिखा और मेहनती युवा बताते हुए कहा कि पंचायत की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को मिलनी चाहिए, जो नई सोच के साथ काम कर सके। उनका कहना था कि गांव में विकास के लिए शिक्षा, समझ और काम करने की इच्छाशक्ति जरूरी है। उन्होंने दिनेश चौधरी को सरपंच बनाए जाने की इच्छा व्यक्त की। इस दौरान युवा नेतृत्व और पुरानी राजनीतिक परंपराओं को बदलने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

युवाओं की मांग - खेल मैदान, डिजिटल लाइब्रेरी और रोजगार

ग्रामीणों के साथ बातचीत में युवाओं की जरूरतों पर भी सवाल उठाए गए। चर्चा के दौरान खेल मैदान, डिजिटल लाइब्रेरी और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे सामने आए। युवाओं से पूछा गया कि क्या पंचायत में ऐसी सुविधाएं विकसित होनी चाहिए, जिनसे बच्चों और युवाओं को खेल, पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। एक युवा ग्रामीण ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में उसे गांव में अपेक्षित विकास नजर नहीं आया। उसने उम्मीद जताई कि दिनेश चौधरी पंचायत के विकास को प्राथमिकता देंगे। ग्रामीणों ने आदर्श पंचायत बनाने की सोच का भी समर्थन किया। हालांकि, खेल मैदान, डिजिटल लाइब्रेरी और रोजगार के लिए किसी निश्चित परियोजना, बजट या समयसीमा की घोषणा इस बातचीत में सामने नहीं आई

‘चुनाव जीतने के बाद सबका काम होना चाहिए’

चुनावी समर्थन के साथ ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण अपेक्षा भी रखी। एक युवक ने कहा कि सरपंच बनने वाले प्रतिनिधि को केवल अपने समर्थकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसके अनुसार, चुनाव में किसी ने समर्थन किया हो या नहीं, जीतने के बाद सभी ग्रामीणों की समस्याओं का समान रूप से समाधान होना चाहिए। उसने उम्मीद जताई कि दिनेश चौधरी निर्वाचित होने की स्थिति में सभी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करेंगे। यह बात पंचायत चुनाव के एक महत्वपूर्ण पहलू को सामने लाती है। चुनाव किसी एक उम्मीदवार की जीत का विषय हो सकता है, लेकिन पंचायत के विकास का लाभ सभी ग्रामीणों तक पहुंचना चाहिए।

बुजुर्गों ने उठाए बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट के मुद्द

ग्रामीणों से बातचीत में बुजुर्गों ने भी विकास से जुड़ी अपनी प्राथमिकताएं बताईं। उन्होंने सड़क, बिजली, स्ट्रीट लाइट, नाली और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग रखी। एक बुजुर्ग ने कहा कि पहले भी सरपंच बने, लेकिन उनके अनुसार गांव में अपेक्षित काम नहीं हुए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार पंचायत में बदलाव होगा और अधूरे विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। कुछ बुजुर्गों ने दिनेश चौधरी के युवा होने को सकारात्मक पहलू बताया।